(बेगूसराय से विकाश मिश्रा की रिपोर्ट)
Begusarai News : बेगूसराय के इतिहास के पन्नों में कई ऐसे स्थल दर्ज हैं, जो बाहर से भले ही साधारण नजर आते हों, लेकिन उनके भीतर सदियों पुरानी सभ्यता, संस्कृति और आस्था की अनमोल विरासत छिपी होती है. बेगूसराय जिले के मंझौल स्थित कमला महना या मुनि स्थान भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो आज भी स्थानीय लोगों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. काबर झील और जयमंगलागढ़ से जुड़ा यह क्षेत्र इतिहास प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का विषय है.
जयमंगलागढ़ राज्य की समृद्ध बस्ती माना जाता था यह इलाका
मंझौल गांव से लगभग पांच किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित कमला महना, जयमंगलागढ़ के पश्चिम और काबर झील के दक्षिण-पश्चिम कोने पर अवस्थित है. यह ऊंची भूमि प्राचीन मानव बसावट और ऐतिहासिक अवशेषों के लिए प्रसिद्ध रही है. स्थानीय लोगों के अनुसार यह क्षेत्र कभी जयमंगलागढ़ राज्य की एक समृद्ध और विकसित बस्ती हुआ करता था. आज भी यहां की मिट्टी से प्राचीन काल की सामग्री और पुरातात्विक अवशेष मिलने की बातें सामने आती रहती हैं.
सिद्ध मुनि की तपोभूमि से जुड़ी है नामकरण की कहानी
लोक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में इस स्थान पर एक सिद्ध मुनि निवास करते थे. कहा जाता है कि उन्होंने कठोर तपस्या और साधना के बल पर ऐसी सिद्धियां प्राप्त कर ली थीं कि वे जल पर भी चल सकते थे. श्रद्धालुओं का मानना है कि वे प्रतिदिन काबर झील के रास्ते जयमंगलागढ़ स्थित मां जयमंगला मंदिर में पूजा-अर्चना करने जाते थे और लौटकर मंझौल के थुम्भ स्थल पर साधना करते थे.
मां जयमंगला के अनन्य भक्त थे सिद्ध मुनि
ग्रामीणों के अनुसार सिद्ध मुनि मां जयमंगला के परम भक्त थे और तांत्रिक विद्याओं में भी निपुण माने जाते थे। कुछ लोगों का मानना है कि उनका संबंध बौद्ध तांत्रिक परंपरा से भी रहा होगा. वर्षों तक साधना और पूजा-अर्चना के बाद उन्होंने इसी स्थान पर देह त्याग दी। उनकी स्मृति में लोगों ने इस स्थल को “मुनि स्थान” कहना शुरू किया, जो समय के साथ “महना” नाम से प्रसिद्ध हो गया.
आज भी जीवित हैं सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं
समय बदलने के बावजूद कमला महना की धार्मिक पहचान बरकरार है. हर वर्ष यहां विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण भाग लेते हैं. पूजा के बाद ब्राह्मणों को शुद्ध दूध से बनी खीर का प्रसाद खिलाने की परंपरा आज भी निभाई जाती है. स्थानीय किसान इस क्षेत्र को अपने बहियार और बाध क्षेत्र के रूप में उपयोग करते हुए इसकी धार्मिक गरिमा को बनाए रखे हुए हैं.
पुरातत्वविदों के लिए भी महत्वपूर्ण है कमला महना
स्थानीय इतिहासकारों और वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि कमला महना और जयमंगलागढ़ का विकास ईसापूर्व काल से जुड़ा हुआ है. यहां समय-समय पर काले और लाल मृदभांड सहित कई प्राचीन अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में प्राचीन सभ्यता के अस्तित्व की ओर संकेत करते हैं. बिहार के प्रसिद्ध साहित्यकार हवलदार त्रिपाठी सचदेव ने भी अपनी रचनाओं में कमला महना का उल्लेख किया है.
संरक्षण और शोध की प्रतीक्षा में है ऐतिहासिक धरोहर
कमला महना केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि इतिहास, लोककथाओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है. यहां की धरती में दबी अनगिनत कहानियां आज भी शोध और संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही हैं. यदि इस क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन और संरक्षण किया जाए, तो बिहार के प्राचीन इतिहास के कई नए अध्याय सामने आ सकते हैं.
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