Begusarai News (विकाश मिश्रा) : “रघुनाथपुर एक्सप्रेस का दीदार करना हो या फिर उसकी सवारी करना चाहते हैं तो आइए ना हमर बेगूसराय अब जरा संभल कर पढ़िए…ये कोई ट्रेन नहीं,ना ही किसी गांव का नाम…बल्कि ये है 11 लाख रुपये कीमत वाला एक दमदार रेसिंग घोड़ा! रघुनाथपुर एक्सप्रेस की कहनी.बेगूसराय जिला के साहेबपुर कमाल के रघुनाथपुर गांव का नाम आज सिर्फ बिहार ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश तक चर्चा में है.
25-25 हजार रुपये तक का नगद पुरस्कार जीता
इसकी वजह बना है गांव का चर्चित घोड़ा रघुनाथपुर एक्सप्रेस जिसने पारंपरिक घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है. इस खास घोड़े के मालिक गांव के युवा और घुड़सवारी प्रेमी प्रिंस यादव हैं.बचपन से घोड़ों के प्रति लगाव रखने वाले प्रिंस ने अपने शौक को जुनून में बदल दिया और बड़ी मेहनत एवं लगन से रघुनाथपुर एक्सप्रेस को तैयार किया. आज यही घोड़ा बिहार और उत्तर प्रदेश के कई बड़े पारंपरिक घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में जीत का परचम लहरा रहा है.बताया जाता है कि प्रिंस यादव ने जनवरी महीने में मोतिहारी के रानी कोठी निवासी मो. फरहान से इस घोड़े को करीब 11 लाख रुपये में खरीदा था. महज पांच महीनों में रघुनाथपुर एक्सप्रेस आठ बड़ी घुड़दौड़ प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुका है और कई जगहों पर 25-25 हजार रुपये तक के नगद पुरस्कार जीत चुका है.
घुड़सवार की भूमिका बेहद अहम
इस दौरान घुड़सवार राजेश कुमार की भूमिका भी काफी अहम रही.उनकी बेहतरीन घुड़सवारी और नियंत्रण की बदौलत रघुनाथपुर एक्सप्रेस ने कई प्रतियोगिताओं में जीत हासिल की.उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर,ब्रह्मपुर,सिवान से लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर,फैजाबाद और लखनऊ तक आयोजित प्रतियोगिताओं में इस घोड़े ने कई शील्ड, मोटरसाइकिल और नकद इनाम जीतकर इलाके का गौरव बढ़ाया है.जैसे ही रघुनाथपुर एक्सप्रेस जीत दर्ज कर गांव लौटा,पूरे गांव में खुशी का माहौल बन गया.ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ विजेता टीम का जोरदार स्वागत किया.
पूरे गांव में जश्न का माहौल
लोगों का कहना है कि यह सिर्फ एक घोड़े की जीत नहीं,बल्कि पूरे गांव के सम्मान और गौरव की बात है. प्रिंस यादव ने बताया कि उन्हें घुड़सवारी का शौक बचपन में लगा था. जब वे अपने ननिहाल जाते थे,वहां घोड़ों को देखकर उनके मन में इस खेल के प्रति आकर्षण पैदा हुआ. आज उनके पास कुल सात घोड़े हैं और वे घुड़सवारी को नई पहचान दिलाने में जुटे हुए हैं. उन्होंने कहा कि घोड़ा का नाम अपने गांव रघुनाथपुर के नाम रघुनाथपुर एक्सप्रेस रखे हैं. रघुनाथपुर एक्सप्रेस की लगातार सफलता ने यह साबित कर दिया है कि गांव की प्रतिभाएं भी मेहनत,जुनून और समर्पण के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना सकती हैं. फिलहाल पूरे रघुनाथपुर गांव में जश्न का माहौल है और लोग अपने इस “चैंपियन घोड़े” पर गर्व महसूस कर रहे हैं.
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