Vat Savitri News: बेगूसराय जिले में भारतीय संस्कृति में पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाने वाला महापर्व वट सावित्री इस वर्ष 16 मई (शनिवार) को मनाया जाएगा. इस अवसर पर बेगूसराय सहित पूरे बिहार में सुहागिन महिलाओं के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है. महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए वट वृक्ष (बरगद) की विशेष पूजा-अर्चना करेंगी.
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
वट सावित्री का पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति, पारिवारिक मूल्यों और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संगम है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सावित्री ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे। यह पर्व इसी अटूट प्रेम और विश्वास का संदेश देता है.
पूजन का शुभ मुहूर्त
बेगूसराय के न्यू प्रोफेसर्स कॉलोनी निवासी प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राघवेंद्र झा (हीरा जी) के अनुसार, इस वर्ष पूजा के लिए दो विशेष शुभ समय उपलब्ध हैं, जो इस प्रकार हैं.
प्रथम शुभ मुहूर्त: सुबह 07:12 बजे से सुबह 08:24 बजे तक.
द्वितीय शुभ मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:44 बजे तक.
प्रकृति और परंपरा का संगम
पर्व के दौरान महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा कर उसमें रक्षा सूत्र बांधती हैं। बरगद के वृक्ष को ‘अक्षय’ माना जाता है, जो दीर्घायु का प्रतीक है. पंडित हीरा जी बताते हैं कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है.
पर्व को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है, जहां महिलाएं पूजन सामग्री और श्रृंगार के सामानों की खरीदारी करती नजर आ रही हैं.
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