बेगूसराय में मनरेगा घोटाले पर लोकपाल का बड़ा एक्शन, मुखिया समेत 6 पर जुर्माना, वसूली का आदेश

Begusarai News: बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड में मनरेगा योजना में बड़ी वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है. मामले में लोकपाल मनरेगा ने तत्कालीन पीओ, जेई, सहायक अभियंता, मुखिया और रोजगार सेवक को दोषी करार दिया और सरकारी राशि की वसूली का कड़ा आदेश जारी किया है.

Begusarai News: (डबलु कुमार की रिपोर्ट) बेगूसराय जिले के बछवाड़ा प्रखंड से मनरेगा योजना में एक बड़ी गड़बड़ी और वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है. लोकपाल मनरेगा कार्यालय बेगूसराय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बछवाड़ा के तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी, सहायक अभियंता , कनीय अभियंता, वर्तमान मुखिया और पंचायत रोजगार सेवक को नियमों की धज्जियां उड़ाने का दोषी पाया है. लोकपाल ने न केवल इन सभी पर जुर्माना ठोका है, बल्कि योजना में दुर्भावनापूर्ण तरीके से खर्च की गई सरकारी राशि को इनके वेतन और जेब से वसूलने का भी आदेश जारी किया है.

जानिए क्या है पूरा मामला और किस योजना में हुई गड़बड़ी

मामला बछवाड़ा प्रखंड के ग्राम पंचायत चमथा-02 के वार्ड नंबर-08 का है. यहाँ एसबीआई चमथा घाट के परिसर में मिट्टी भराई-सह-पेवर ब्लॉक निर्माण का कार्य कराया गया था. इस योजना के लिए कुल प्राक्कलित राशि ₹5,52,261 निर्धारित थी, जिसमें से कागजों पर मजदूरी मद में ₹1,98,480 का व्यय दिखाया गया था.

चमथा गांव के निवासी संतोष कुमार सिंह ने इस भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल कार्यालय में परिवाद दर्ज कराया था. शिकायत में आरोप था कि यह कार्य मनरेगा मार्गदर्शिका के नियमों के खिलाफ जाकर कुछ लोगों को निजी लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है.

जांच में सच साबित हुई शिकायत, नियमों का पाया गया उल्लंघन

शिकायत दर्ज होने के बाद लोकपाल के निर्देश पर कार्यपालक अभियंता (मनरेगा, बेगूसराय) द्वारा स्थलीय जांच की गई. जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिस स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के परिसर और उसके पिछले हिस्से में यह पेवर ब्लॉक सड़क बनाई गई, वह वास्तव में किसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि नहीं, बल्कि निजी भूमि है, जो पूर्व मुखिया स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद सिंह के परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज है. मनरेगा गाइडलाइंस के तहत निजी भूमि पर इस प्रकार का सार्वजनिक कार्य बिना उचित और विशेष प्रावधानों के नहीं कराया जा सकता. लोकपाल ने निष्कर्ष निकाला कि इस योजना पर किया गया पूरा सरकारी खर्च पूरी तरह विफल और नियमों का घोर उल्लंघन है.

लोकपाल ने सुनाया कड़ा फैसला, इन 5 आरोपियों से होगी रिकवरी

लोकपाल मनरेगा बेगूसराय द्वारा जारी आदेश पत्र के तहत दोषी पाए गए अधिकारियों और जनप्रतिनिधि पर कुल ₹5,000 का जुर्माना लगाने के साथ-साथ ₹1,98,480 की रिकवरी का आदेश दिया गया है. यानी कुल ₹2,03,480 की राशि इन आरोपियों से वसूली जाएगी.

कार्रवाई के दायरे में आए दोषी:

  1. सुबोध कुमार — तत्कालीन कार्यक्रम पदाधिकारी , बछवाड़ा
  2. अजय कुमार — तत्कालीन सहायक अभियंता
  3. मिथुन कुमार साह — कनीय अभियंता , बछवाड़ा
  4. राकेश कुमार राय — मुखिया, चमथा-02 पंचायत
  5. राकेश कुमार — पंचायत रोजगार सेवक, चमथा-02

एसबीआई के खाते में जमा करानी होगी राशि, डीडीसी करेंगे मॉनिटरिंग

लोकपाल कार्यालय ने निर्देश दिया है कि संबंधित सभी सरकारी कर्मी और मुखिया इस तय जुर्माना व रिकवरी राशि को राज्य स्तर पर संधारित भारतीय स्टेट बैंक के मनरेगा खाते में जमा कराना सुनिश्चित करेंगे. इसके साथ ही, इस कार्रवाई की अनुपालन रिपोर्ट उप विकास आयुक्त, बेगूसराय को सौंपनी होगी.

इधर, ग्रामीणों (उमेश कुंवर कवि, विजय शंकर दास, राजीव चौधरी, अजय कुमार, अनिल कुमार, हरेराम महतो और विकास कुमार) ने कहा कि प्रखंड की विभिन्न पंचायतों में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए मनरेगा से निजी जमीनों पर मिट्टी व पेवर ब्लॉक का खेल चल रहा है. लोकपाल के इस फैसले से भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मच गया है.

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Published by: Nikhil Anurag

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