Begusarai News: (एस. एम. बेग) आजादी के 78वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है, डिजिटल इंडिया और आधुनिक शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं. लेकिन बेगूसराय जिले की नावकोठी प्रखंड के महेशवारा गांव की जमीनी हालात इन दावों को मुंह चिढ़ा रहे हैं. यहां आज भी नई पीढ़ी एक अदद हाई स्कूल के लिए लालायित है. गांव में सिर्फ मिडिल स्कूल तक की पढ़ाई की व्यवस्था है, जिसके कारण आगे की शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को तीन से चार किलोमीटर दूर पहसारा या मंझौल का रुख करना पड़ता है.
गौरवशाली अतीत से बदहाली के दौर तक
एक दौर था जब महेशवारा पंचायत के प्रथम मुखिया और विख्यात शिक्षाविद स्व. जगदीश प्रसाद सिंह के कार्यकाल में इस गांव को संपूर्ण बिहार में ‘आदर्श पंचायत’ घोषित किया गया था. उन्होंने जनसहयोग से गांव में मिडिल स्कूल और हाईस्कूल, भव्य पुस्तकालय एवं पंचायत भवन, कोऑपरेटिव सोसाइटी और डाकघर, जैसी तमाम आधुनिक सुविधाओं की स्थापना की थी. इसी सुनहरे दौर में ‘श्रीकृष्ण उच्च विद्यालय, महेशवारा’ की स्थापना हुई थी.
बेटियों की शिक्षा पर पड़ा सबसे गहरा आघात
इस स्कूल के बंद होने का सबसे दर्दनाक असर गांव की बेटियों पर पड़ा। ग्रामीण परिवेश और सुरक्षा कारणों से अभिभावक अपनी बेटियों को अपने गांव से दूर दूसरे गांवों (पहसारा या मंझौल) में पढ़ने भेजने से कतराते रहे. नतीजा यह हुआ कि मिडिल स्कूल (आठवीं) पास करने के बाद अधिकांश छात्राओं की पढ़ाई पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लग गया और उनका भविष्य अंधकारमय हो गया. लड़कों को भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे कई गरीब छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं.
सरकारी नीतियां बनीं राह का रोड़ा
वर्तमान में सरकार की नीति है कि हर पंचायत में एक ही ‘प्लस टू’ (10+2) विद्यालय संचालित किया जा सकता है. इसी तकनीकी पेंच और सरकारी उदासीनता के कारण ग्रामीणों के पुरजोर प्रयासों के बाद भी यहां के मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उत्क्रमित नहीं किया जा सका है.
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