बाढ़ से बेगूसराय का हाल बेहाल: 20 पंचायतों में घुसा पानी, 22 हजार लोग प्रभावित, छतों पर शरण लेने को मजबूर परिवार

बेगूसराय में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का कहर जारी है. जिले के 24 गांवों की 22 हजार आबादी प्रभावित है, वहीं नगर निगम क्षेत्र के 4 वार्डों में भी पानी घुस गया है. बाढ़ राहत और बचाव कार्य जारी हैं.

Begusarai Flood : गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर ने बेगूसराय में बाढ़ की स्थिति को गंभीर बना दिया है. जिले के पांच अंचलों की 20 पंचायतों के 24 गांव और 45 वार्ड प्रभावित हैं. प्रशासन के मुताबिक करीब 22 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं. ग्रामीण इलाकों के बाद अब नगर निगम क्षेत्र में भी पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गई है.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही, राहत और बचाव के लिए फिलहाल 87 नावें लगाई गई हैं. इनमें 11 सरकारी और 76 निजी नाव शामिल हैं. प्रशासन का कहना है कि जरूरत बढ़ने पर नावों की संख्या और बढ़ाई जाएगी. दूसरी ओर, कई इलाकों में पानी फैलने के कारण लोगों को घर छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है.

नगर निगम के चार वार्डों में घुसा पानी, बांध पर पहुंचे परिवार

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अब बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र में भी दिखने लगा है. वार्ड संख्या 4 के लभरचक, वार्ड संख्या 5 के कमरुद्दीनपुर, वार्ड संख्या 6 के मुसनटोल और वार्ड संख्या 18 के कैलाशपुर में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है.

पानी बढ़ने के बाद इन इलाकों के कई परिवार जरूरी सामान लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकलने लगे हैं. कुछ परिवार पहले ही बांध पर पहुंच चुके हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले दो दिनों से जलस्तर में धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही थी, लेकिन गुरुवार देर रात पानी बढ़ने की रफ्तार तेज हो गई. इसके बाद निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के सामने घर खाली करने की स्थिति बन गई.

लोगों को हर दिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है

लोगों के लिए सिर्फ खुद और अपने परिवार को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना ही चुनौती नहीं है. बड़ी संख्या में परिवारों के साथ उनके मवेशी भी हैं, जिन्हें सुरक्षित जगह ले जाना और उनके लिए चारे का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है.

तेघड़ा में घर छोड़ने की मजबूरी, पशुओं के चारे की भी चिंता

तेघड़ा प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी पानी फैलने से जनजीवन प्रभावित हुआ है. कई परिवार घर छोड़कर ऊंचे स्थानों की तलाश में निकल रहे हैं. जिन लोगों के पास मवेशी हैं, उनके लिए परेशानी और बढ़ गई है, क्योंकि बाढ़ के बीच पशुओं को रखने की जगह और चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गया है.

प्रभावित परिवारों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें राहत शिविर, भोजन, पेयजल और दवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है. कुछ परिवारों को अब तक समुचित राहत शिविर नहीं मिल सका है, जिसके कारण वे खुले आसमान के नीचे या अस्थायी ठिकानों में रहने को मजबूर हैं.

ग्रामीणों ने प्रशासन से पर्याप्त संख्या में राहत शिविर शुरू करने के साथ भोजन, साफ पेयजल, जरूरी दवाओं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है.

साहेबपुरकमाल में सैकड़ों घरों तक पहुंचा पानी

साहेबपुरकमाल प्रखंड में भी गंगा के उफान का असर व्यापक है. गंगा नदी और बांध के बीच बसे सलेमाबाद, ज्ञान टोल, बहलोरिया छर्रा पट्टी, श्रीनगर, रघुनाथपुर और हीराटोल समेत कई गांव प्रभावित हैं.

इन इलाकों में सैकड़ों घरों में पानी प्रवेश कर चुका है. कई परिवार सुरक्षित जगहों पर जा चुके हैं, जबकि कुछ लोग अभी भी अपने घरों की छतों पर रहने को मजबूर हैं. घरों में पानी घुसने के कारण खाना पकाने, पीने के पानी और मवेशियों को सुरक्षित रखने जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल हो गई हैं.

छतों पर शरण ले रहे परिवार

छतों पर शरण लिए परिवारों को बारिश और धूप से बचने के लिए प्लास्टिक की जरूरत है. इसके अलावा लोग भोजन, शुद्ध पेयजल, दवा और पशुचारे की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि अगर गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में और अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है.

87 नावों से राहत-बचाव, जरूरत पड़ने पर बढ़ेगी संख्या

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नावों का सुचारु परिचालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. फिलहाल 11 सरकारी और 76 निजी समेत कुल 87 नावें लोगों की आवाजाही और राहत-बचाव कार्य में लगाई गई हैं.

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित परिवारों तक समय पर पहुंच बनाना है. इसके लिए नावों के परिचालन के साथ राहत शिविरों और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता पर भी ध्यान देना जरूरी है.

आगे क्या चुनौती है

बेगूसराय में बाढ़ अब केवल ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रही है. नगर निगम के चार वार्डों में पानी पहुंचने के साथ प्रभावित आबादी का दायरा बढ़ा है. ऐसे में अगले कुछ दिनों में जलस्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखना अहम होगा.

करीब 22 हजार लोगों के प्रभावित होने के बीच प्रशासन के लिए सुरक्षित आवाजाही के साथ भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, दवाएं और पशुचारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है. प्रभावित परिवारों की सुरक्षा इस समय सबसे महत्वपूर्ण है और जलस्तर में होने वाले बदलाव के साथ राहत-बचाव व्यवस्था को भी उसी के अनुसार बढ़ाना जरूरी होगा.

शहीद मनीष के परिजनों से मिले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, छोटी बेटी को गोद में लेकर हुए भावुक, बड़ी बेटी से पढ़ाई की ली जानकारी

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >