Begusarai News : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर छौड़ाही प्रखंड में काम युद्धस्तर पर चल रहा है. पंचायतवार राजस्व ग्रामों के कुल 22,881 प्लॉट का डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है. इसके लिये एक विशेष मोबाइल ऐप में जियो-फेंसिंग तकनीक विकसित किया गया है.
सर्वेयर को अनिवार्य रूप से खेत की तय भौगोलिक सीमा के भीतर जाना पड़ रहा है, तभी जाकर ऐप में डेटा दर्ज होता है. वहीं से खड़ी फसल की जियो-टैग और टाइम-स्टैम्प वाली फोटो अपलोड की जाती है. इससे फर्जीवाड़े पर पूरी तरह लगाम लगेगा बल्कि पीएम-किसान सम्मान निधि सहित सभी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे असली किसान तक पहुंचेगा.
वहीं दूसरी तरफ बाढ़, सुखाड़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा में फसल नुकसान का सही और वैज्ञानिक आकलन कर तुरंत मुआवजा देना आसान होगा. किंतु इस हाईटेक योजना को जमीन पर उतारने वाले कृषि कर्मी महज 10 रुपये प्रति प्लॉट के लिये अपनी जान हथेली पर लेकर घूम रहे हैं.
प्रखंड की ऐजनी, सिहमा, मालपुर, शाहपुर, सावंत, अमारी, सहुरी, नारायणपीपर, परोरा और एकंबा में किसान सलाहकार, कृषि समन्वयक और प्रखंड तकनीकी प्रबंधक सुबह से शाम तक खेतों में भटक रहे हैं.
जोखिम भरा सर्वे कार्य और सुरक्षा का अभाव
काबर परिक्षेत्र के एक जंगलनुमा प्लॉट पर सर्वे कर रहे किसान सलाहकार अनीश कुमार ने बताया कि योजना जितनी बड़ी है, उसे करने वालों की हालत उतनी ही खराब है। विभाग इस पूरे कार्य के लिए सर्वेयर को मात्र 10 रुपये प्रति प्लॉट का भुगतान कर रहा है. छौड़ाही के काबर परिक्षेत्र के अलावा चौर-बहियार वाले इलाके में एक प्लॉट तक पहुंचने में कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है.
बताया गया कि अभी हाल के दिनों में प्रखंड के एक किसान सलाहकार का खेत में फोटो लेते समय विषैले कोबरा सांप से आमना-सामना हो गया. वह मौत के मुंह से किसी तरह बचें. इसके अलावा सर्वे के दौरान सुनसान इलाकों में कई बार जंगलों में अवैध शराब और प्रतिबंधित पदार्थ बनाने वालों से भी सामना हो जाता है, जहां मोबाइल नेटवर्क तक नहीं रहता.
इतने जोखिम भरे काम के लिये कृषि विभाग ने आज तक एक भी सुरक्षा किट, गमबूट, टोपी या प्राथमिक उपचार बॉक्स तक उपलब्ध नहीं कराया है न ही किसी तरह का बीमा कराया गया है.
अधिकारियों के उदासीन रवैये से कर्मियों में आक्रोश
किसान सलाहकार के मुताबिक जब कर्मियों ने इसको लेकर वरीय अधिकारियों से गुहार लगायी तो जवाब और भी ज्यादा हैरान कर देने वाला मिला. एक वरीय अधिकारी ने कहा, जैसे सड़क पर मोटरसाइकिल से एक्सीडेंट होता है, वैसे ही खेत में सांप का काटना भी एक एक्सीडेंट है. इसमें विभाग क्या करेगा?
अधिकारी के इस बयान के बाद से छौड़ाही प्रखंड के कृषि कर्मियों में भारी नाराजगी है. कर्मियों का कहना है कि 10 रुपये में पेट्रोल का खर्च भी नहीं निकलता. सर्वे का मानदेय को कम से कम 50 रुपये प्रति प्लॉट किया जायें. साथ ही सभी को सुरक्षा किट, मेडिकल बीमा और पहचान पत्र दिया जायें ताकि खेत में कोई रोके-टोके नहीं और सर्वे कर्मी खुद को सहज महसूस कर सकें.
