Bankipur Bypoll 2026: बिहार की राजनीति में इन दिनों बांकीपुर विधानसभा सीट सबसे अधिक चर्चा में है. उपचुनाव की घोषणा के बाद यह सीट राज्य की सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीट बन गई है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां से अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है. वहीं, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत कर रहे हैं. दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता पर दांव लगाया है, जबकि जनशक्ति जनता दल की ओर से वीणा मानवी चुनाव लड़ रही हैं. ऐसे में इस सीट के जातीय समीकरण, चुनावी इतिहास और राजनीतिक महत्व पर पूरे बिहार की नजर टिकी हुई है.
2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट का गठन वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद हुआ. इससे पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा के नाम से जाना जाता था. यह सीट पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और बिहार विधानसभा की 243 सीटों में इसका क्रमांक 182 है.
भाजपा का मजबूत गढ़ क्यों मानी जाती है?
बांकीपुर लंबे समय से भाजपा का सबसे मजबूत शहरी गढ़ माना जाता है. पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने इस क्षेत्र में लगातार जीत दर्ज कर पार्टी का मजबूत आधार तैयार किया. उनके बाद उनके पुत्र नितिन नवीन ने इस राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए लगातार चुनाव जीते. हाल ही में नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उनके इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो गई, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है. यही वजह है कि इस सीट का चुनाव पूरे बिहार की राजनीति के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
क्या है जातीय समीकरण?
राजनीतिक एक्सपर्ट मिथलेश कुमार के अनुसार बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ समुदाय सबसे प्रभावशाली माना जाता है और चुनावी परिणामों पर उसकी अहम भूमिका रहती है. इसके अलावा ब्राह्मण, वैश्य, भूमिहार, राजपूत, यादव, मुस्लिम, कुर्मी, कुशवाहा और दलित मतदाता भी उल्लेखनीय संख्या में हैं. हालांकि किसी भी जाति के आधिकारिक निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और मतदान केवल जातीय आधार पर तय नहीं होता. स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार की छवि, संगठन और चुनावी रणनीति भी परिणाम को प्रभावित करते हैं.
2025 विधानसभा चुनाव परिणाम
2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के नितिन नवीन ने 98,299 वोट (62.66%) हासिल कर राष्ट्रीय जनता दल की रेखा गुप्ता को 51,936 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. रेखा गुप्ता को 46,363 वोट (29.55%), जबकि जन सुराज की उम्मीदवार को 7,717 वोट (4.92%) मिले थे. यही परिणाम भाजपा के मजबूत जनाधार की पुष्टि करता है, लेकिन इस बार उपचुनाव में उम्मीदवार बदलने और प्रशांत किशोर के खुद मैदान में उतरने से मुकाबला काफी रोचक हो गया है.
शहरी सीट होने से चुनावी मुद्दे भी अलग
बांकीपुर पूरी तरह शहरी विधानसभा क्षेत्र है. यहां सड़क, ट्रैफिक, पेयजल, सीवर, पार्किंग, व्यापार, रोजगार, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, कानून-व्यवस्था और नगर निगम की सेवाएं चुनाव के प्रमुख मुद्दे रहते हैं. यही कारण है कि इस सीट पर विकास और शहरी सुविधाओं का मुद्दा जातीय समीकरण के साथ समान रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है.
इस बार क्यों खास है चुनाव?
2026 का उपचुनाव कई मायनों में खास माना जा रहा है. पहली बार प्रशांत किशोर स्वयं चुनावी मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है. भाजपा अपनी परंपरागत सीट बचाने की चुनौती का सामना कर रही है, जबकि राजद और जनशक्ति जनता दल भी इस सीट पर मजबूत प्रदर्शन की कोशिश में हैं. ऐसे में बांकीपुर का चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का भी संकेत माना जा रहा है.
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