विश्व पर्यावरण दिवस : आज ली जा रही पौधे लगाने की शपथ, पर पंजवारा के बाजार में ”पॉलीथिन राज”

Banka News : एक ओर विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण, शपथ और जागरूकता कार्यक्रमों की गूंज है, तो दूसरी ओर बाजारों में प्रतिबंधित पॉलीथिन धड़ल्ले से बिक रही है. सवाल यह है कि जब जमीनी स्तर पर नियमों का पालन ही नहीं हो रहा, तो पर्यावरण संरक्षण की मुहिम कितनी प्रभावी साबित होगी?

पंजवारा बांका से गौरव कश्यप की रिपोर्ट

Banka News : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. पौधारोपण किया जा रहा है, लोगों को पर्यावरण बचाने की शपथ दिलाई जा रही है और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. लेकिन पंजवारा और आसपास के बाजारों की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. यहां प्रतिबंध के बावजूद सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का उपयोग खुलेआम जारी है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

कागजों में प्रतिबंध, बाजार में बेखौफ इस्तेमाल

बिहार सरकार ने वर्ष 2018 में सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया था. इसके बावजूद पंजवारा बाजार सहित आसपास के क्षेत्रों में सब्जी, फल, किराना, मिठाई और कपड़ा दुकानों पर ग्राहकों को आज भी पॉलीथिन में सामान दिया जा रहा है. बाजार की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिबंध का आदेश केवल सरकारी फाइलों तक सीमित होकर रह गया है.

कार्रवाई होती है, लेकिन असर नहीं दिखता

स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर प्रशासनिक कार्रवाई और छापेमारी की खबरें जरूर सामने आती हैं, लेकिन उनका प्रभाव स्थायी नहीं होता. कुछ दिनों तक पॉलीथिन का उपयोग कम दिखाई देता है, लेकिन अभियान समाप्त होते ही बाजार में फिर से पुराने हालात लौट आते हैं. यही वजह है कि प्रतिबंध का उद्देश्य अब तक पूरी तरह सफल नहीं हो पाया है.

नालियों से लेकर पशुओं के पेट तक पहुंच रहा प्लास्टिक

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार सिंगल यूज प्लास्टिक केवल कचरे की समस्या नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है. पॉलीथिन नालियों को जाम कर जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित करती है. इसके अलावा मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित करती है. सड़क किनारे फेंकी गई पॉलीथिन को अक्सर पशु निगल लेते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य और जीवन पर खतरा उत्पन्न हो जाता है.

पर्यावरण दिवस पर उठ रहे हैं बड़े सवाल

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि जब मुख्य बाजारों में खुलेआम प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है तो संबंधित विभागों और प्रशासन की निगरानी व्यवस्था कहां है. लोगों का मानना है कि केवल पौधारोपण और जागरूकता कार्यक्रमों से पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता.

नियमों का पालन नहीं हुआ तो अधूरी रह जायेगी मुहिम

स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण की मुहिम तभी सफल होगी, जब जागरूकता के साथ-साथ नियमों का सख्ती से पालन भी कराया जाए. अन्यथा पर्यावरण दिवस पर होने वाले कार्यक्रम केवल औपचारिकता बनकर रह जाएंगे और संरक्षण की पूरी कवायद भाषणों, शपथों और पोस्टरों तक ही सीमित होकर रह जाएगी.

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Published by: Amit kumar sinh

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