संजीव पाठक, बौंसी. ऐतिहासिक मंदार क्षेत्र इन दिनों होली के रंग में पूरी तरह सराबोर है. यहां स्थित भगवान मधुसूदन मंदिर में पारंपरिक होली गीत-संगीत के माध्यम से श्रद्धालु भगवान को रिझाने में जुटे हैं. सरस्वती पूजन के बाद से ही ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात तक होली गायन का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो पूरे फाल्गुन माह तक भक्ति और उल्लास का वातावरण बनाए रखता है. मंदार क्षेत्र में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह लोक आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति का विराट उत्सव है. मधुसूदन मंदिर के सामने स्थित फगदोल में प्रतिदिन श्रद्धालु देर रात तक एकत्रित होकर ढोल, मंजीरा और झाल की धुन पर पारंपरिक फाग गाते हैं. भक्ति रस में डूबे ये गीत वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं.
होलिकोत्सव की शुरुआत लगभग एक माह पूर्व हो जाती है. संतों और कीर्तन मंडलियों द्वारा गांव-गांव में होली गीत गाये जाते हैं. संकीर्तन टोलियां भगवान मधुसूदन के दरबार में हाजिरी लगाकर लोक परंपरा को जीवंत बनाए रखती हैं. ग्रामीण अंचलों में समूह बनाकर रातभर फाग गाने की परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा से मंदार क्षेत्र में निभायी जा रही है.मधुसूदन मंदिर में गूंज रहे पारंपरिक होली गीत, देर रात तक फगदोल में उमड़ रहे श्रद्धालु
ऐतिहासिक मंदार क्षेत्र इन दिनों होली के रंग में पूरी तरह सराबोर है. यहां स्थित भगवान मधुसूदन मंदिर में पारंपरिक होली गीत-संगीत के माध्यम से श्रद्धालु भगवान को रिझाने में जुटे हैं.
