भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था की बदौलत परेशानियों को झूमते-गाते किया पार

चिलचिलाती धूप में अपने कदमों को बढ़ाते व आसमान की ओर निहारते बुधवार को शिवभक्त पांव पैदल यात्रा करते रहे.

श्रावणी मेला के 20वें दिन चिलचिलाती धूप ने ली भक्तों की परीक्षा

दीपक चौधरी, कटोरिया. फिल्म गंगाधाम के प्रसिद्ध शिवभजन ‘मोर भंगिया के मनाय द हो भैरोनाथ, मोर भंगिया के मनाय द’ को गाते चिलचिलाती धूप में अपने कदमों को बढ़ाते व आसमान की ओर निहारते बुधवार को शिवभक्त पांव पैदल यात्रा करते रहे. श्रावणी मेला के 20वें दिन भोलेनाथ ने अपने भक्तों की कठिन परीक्षा ली. हालांकि देवों के देव महादेव ने भक्तों की पुकार सुनी और शाम ढलने से पहले रिमझिम बारिश रूपी कृपा भी बरसाई. बुधवार को सुबह दस बजे से लेकर शाम चार बजे तक धूप की तपिश व तपती कच्ची पथ के बीच शिवभक्त महादेव की भक्ति में लीन होकर कांवर यात्रा करते रहे. इस दौरान कोई लाठी के सहारे, तो कोई गमछा ओढ़कर, तो कोई छतरी खोलकर भी बाबा की नगरी देवघर की ओर कदम बढ़ाते रहे. ‘भोले बाबा पार करेगा’, ‘बोलबम का नारा है, बाबा एक सहारा है’ ‘बाबा नगरिया दूर है, जाना जरूर है’ व ‘बोलबम’ के उदघोष के साथ व औघड़दानी भोलेनाथ का ध्यान लगाए श्रद्धालु अपनी संकल्प यात्रा को पूरी करने में तल्लीन रहे. तेज धूप के कारण बुधवार को कांवरिया पथ के जिलेबिया मोड़, टंगेश्वर, सुईया पहाड़, गड़ुआ जंगल, आमाटील्हा, अबरखा की चढ़ाई के अलावा देवासी व इनारावरण के जंगली इलाकों में पैदल चलते हुए कांवरिये पसीने से तर-बतर भी रहे. बावजूद इसके भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था, श्रद्धा, भक्ति व विश्वास की बदौलत रास्ते की परेशानियों को भक्त हंसते-खेलते, गाते-झूमते पार करते दिखे. इस दौरान कई श्रद्धालु ‘केवड़िया खोलो ए बाबा, आइल बानी तोहरी दुअरिया, केवड़या खोलो ए बाबा’ भजन भी गाते चल रहे थे.

गन्ना जूस, शरबत व ठंडा मिनरल वाटर की सेवा ने दी राहत

कच्ची कांविरया पथ में जगह-जगह संचालित विभिन्न सेवा शिविरों के सामने तेज गर्मी के कारण विशेष सेवा का भी संचालन किया गया. शिविरों के आगे गन्ना जूस, शरबत, ठंडा मिनरल वाटर व कोल्ड ड्रिंक्स आदि की सेवा प्राप्त कर कांवरियों ने अपनी प्यास बुझाई. फिर खुद को तरो-ताजा कर आगे की यात्रा जारी रखी. कांवरिया पथ में बोलबम सेवा समिति दलसिंहसराय, व्याहुत कलवार सेवा समिति पाकुड़, छत्तीसगढ़ धर्मशाला, नि:शुल्क पूर्णिया सेवा शिविर, किशनगंज सेवा सदन, जोगबनी विराटनगर कांवरिया सेवा शिविर, मिथिला कांवरिया आश्रम, नथमल धर्मशाला, असम धर्मशाला आदि जगहों में भी कांवरियों को विभिन्न प्रकार की नि:शुल्क सेवाएं प्रदान कर राहत पहुंचाने का कार्य किया गया.

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