पंजवारा (बांका) से गौरव कश्यप की रिपोर्ट : 25 मई से रोहिणी नक्षत्र का प्रवेश होने जा रहा है. ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार रोहिणी के दौरान पड़ने वाली तेज गर्मी अच्छी बारिश का संकेत मानी जाती है. किसानों का कहना है कि “रोहिणी जितना तपेगा, मानसून उतना बेहतर होगा.” यही वजह है कि खेतों में धान की खेती करने वाले किसान इस तपिश को भविष्य की अच्छी फसल से जोड़कर देख रहे हैं.
बाराहाट, सबलपुर, मोहानी, चचरा, हैवतपुर, पंजवारा, चरसीया, गोबिंदपुर और महुआ जैसे इलाकों में खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है. ऐसे में किसान मानसून की उम्मीद में गर्मी सहने को मजबूर हैं.बिजली गुल तो पेड़ों के नीचे जुट रहे लोग
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आंख-मिचौली ने परेशानी और बढ़ा दी है. जैसे ही बिजली कटती है, लोग घरों से निकलकर आम, पीपल और बरगद के पेड़ों के नीचे बैठकर राहत पाने की कोशिश करते हैं. गांवों में कई जगहों पर लोग दिनभर छांव में बैठकर समय काटते दिखाई दे रहे हैं.कार्यालयों और बाजारों में भी दोपहर के समय सन्नाटा देखने को मिल रहा है. तेज धूप के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही बाहर निकल रहे हैं.
डॉक्टर ने दी चेतावनी, बच्चों और बुजुर्गों को खास सावधानी की जरूरत
स्थानीय चिकित्सक डॉ. उदय शंकर झा ने लोगों को लू और हीटवेव से बचने की सलाह दी है. उन्होंने कहा कि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को दोपहर की धूप से बचना चाहिए. शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है.उन्होंने आम का पन्ना, लस्सी, दही, खीरा, ककड़ी और तरबूज जैसे ठंडक देने वाले खाद्य पदार्थों के सेवन की सलाह दी. साथ ही ग्लूकोज और हल्के भोजन को भी गर्मी में जरूरी बताया.गर्मी बनी बड़ी चुनौती, मानसून का इंतजार
फिलहाल मौसम विभाग और स्थानीय लोग दोनों मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है. ऐसे में लोगों की नजर अब मानसून पर टिक गई है. भीषण गर्मी के बीच हर किसी को राहत की बारिश का इंतजार है.
