Shravani Mela 2026 : विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत गुरुवार को सावन मास के पहले दिन हुई. इसके साथ ही बांका शहर सहित जिले के विभिन्न शिवालय श्रद्धालुओं से गुलजार हो उठे. अहले सुबह से ही कांवरियों और शिवभक्तों के जत्थे मंदिरों में पहुंचने लगे. श्रद्धालुओं ने गंगाजल, बेलपत्र, धूप, दीप, चंदन, अक्षत और मिष्ठान अर्पित कर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया तथा विधिवत पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की. मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण "बोल बम" तथा "हर-हर महादेव" के जयघोष से गुंजायमान रहा.
अष्टकमल मंदिर में भगवान विष्णु की विशेष आराधना
बौंसी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक मंदार पर्वत की तराई में पापहारिणी सरोवर के मध्य अवस्थित अष्टकमल मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही. यहां भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना कर भक्तों ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. मंदिर का पट सुबह पांच बजे खोला गया. सुबह 7:30 बजे आरती हुई, दोपहर 12 बजे भगवान को भोग लगाया गया और दोपहर एक बजे पुनः श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए गए. संध्या 6:30 बजे पापहारिणी तट पर महाआरती के बाद भगवान को भोग अर्पित किया गया.
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई नियमित पूजा
मंदिर के पुजारी भुवनेश्वर उर्फ भवेश झा, विभूति पाठक और लखन झा ने बताया कि अष्टकमल मंदिर में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना होती है. सावन के पहले दिन श्रद्धालुओं ने केले के वृक्ष की भी पूजा की. धार्मिक मान्यता है कि केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है और इस दिन उनकी आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
भयहरण स्थान से मधुसूदन मंदिर तक विशेष अनुष्ठान
शहर के भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर, जगतपुर ठाकुरबाड़ी सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई. वहीं मंदार स्थित मधुसूदन मंदिर में भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया गया. पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा एवं लक्ष्मण झा ने सुबह विशेष पूजा कराई. दोपहर में भगवान को भोग लगाया गया और शाम में श्रृंगार पूजा के साथ भव्य आरती का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.
