सरकारी चापाकल खराब रहने से आमजन परेशान

प्रखंड में अधिकांश चौक-चौराहों पर लगाए गए चापाकल से पानी नहीं निकल रहा है. विभाग को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गयी है.

अमरपुर. प्रखंड में अधिकांश चौक-चौराहों पर लगाए गए चापाकल से पानी नहीं निकल रहा है. विभाग को जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ गयी है. क्षेत्र में विभिन्न जगहों पर लगाए गये सरकारी चापाकल विगत कई माह से खराब पड़े हुए हैं. इसी कड़ी में अमरपुर रेफरल अस्पताल के सामने मंदिर परिसर में स्थित चापाकल पिछले कई महीनों से खराब पड़ा हुआ है. यह चापाकल न केवल अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए, बल्कि आसपास के दुकानदारों और राहगिरों के लिए भी एक महत्वपूर्ण जल स्रोत है. इसके खराब हो जाने के बाद लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. कई बार इसकी शिकायत विभागीय अधिकारियों से की गयी, लेकिन अब तक स्थिति जस की तस बनी हुई है. वहीं नगर पंचायत के वार्ड संख्या 12 में पंजाब नेशनल बैंक के पीछे स्थित चापाकल भी करीब छह माह से खराब पड़ा हुआ है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह चापाकल पूरे इलाके के लिए एकमात्र पेयजल स्रोत है. इसके खराब होने के बाद लोगों को निजी साधनों या दूर-दराज के जल स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है. महिलाओं और बच्चों को पानी लाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है. ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो और भी दयनीय है. प्रखंड के कई गांवों में चापाकल या तो पूरी तरह से बंद हैं या फिर बहुत कम पानी दे रहे हैं. कई जगहों पर पानी की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय कर्मी कभी कभार निरीक्षण के लिए आते तो हैं, लेकिन मरम्मत का काम नहीं करते हैं. गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे चले जाने के कारण चापानलों की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है. ऐसे में यदि चापाकल ही खराब पड़े रहें, तो लोगों के सामने पेयजल का गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है. खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह समस्या और भी कठिन हो जाती है, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक जल स्रोत उपलब्ध नहीं होते. स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जतायी है. उनका कहना है कि पीएचईडी विभाग को समय रहते चापानलों की मरम्मत करानी चाहिए थी, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण आज यह स्थिति उत्पन्न हुई है. यदि जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है. लोगों का यह भी आरोप है कि विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक ही सीमित है. जमीनी स्तर पर काम नहीं होने के कारण योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है. कई बार शिकायत करने के बावजूद भी कोई सुनवाई नहीं होती, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

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By SHUBHASH BAIDYA

SHUBHASH BAIDYA is a contributor at Prabhat Khabar.

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