बाराहाट (बांका). दुकान के सहारे उनके परिवार का भरण-पोषण होता भागलपुर-दुमका रेलखंड पर पंजवारा रेलवे हॉल्ट के समीप बाराहाट-गोड्डा मुख्य मार्ग पर बने रेलवे अंडरपास की बदहाल स्थिति आखिरकार प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गई. महीनों से जलजमाव और आवागमन की गंभीर समस्या से जूझ रहे लोगों की शिकायतों के बाद बुधवार को एसडीएम राजकुमार अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे और अंडरपास का निरीक्षण किया. उनके साथ प्रखंड विकास पदाधिकारी गोपाल कुमार गुप्ता, एसडीपीओ चंद्रजीत बैठा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे. रेलवे ने इस अंडरपास का निर्माण इस उद्देश्य से कराया था कि रेल फाटक बंद रहने के दौरान लोगों को जाम और समय की बर्बादी से राहत मिले तथा आवागमन अधिक सुरक्षित हो सके. लेकिन निर्माण के बाद से ही यह अंडरपास स्थानीय लोगों के लिए सुविधा के बजाय बड़ी मुसीबत बन गया है.
अंडरपास में चार से पांच फीट तक भर जाता है पानी
लोगों ने कहा, मामूली बारिश होते ही अंडरपास में चार से पांच फीट तक पानी भर जाता है. इससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है. कई वाहन जलजमाव में खराब हो चुके हैं, जबकि अनेक बाइक चालक फिसलकर घायल हो चुके हैं. बरसात के दिनों में यह अंडरपास दुर्घटनाओं का केंद्र बन जाता है. सबसे चिंताजनक स्थिति तब उत्पन्न होती है जब जलभराव के कारण लोग अपनी जान जोखिम में डालकर सीधे रेलवे ट्रैक पार करने को विवश हो जाते हैं.इसी रेलखंड से प्रतिदिन तेज रफ्तार एक्सप्रेस, पैसेंजर और मालगाड़ियां गुजरती हैं. इसके बावजूद मौके पर न तो कोई रेलवे कर्मी तैनात रहता है और न ही लोगों को सतर्क करने की पर्याप्त व्यवस्था रहती है. ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
एसडीएम राजकुमार ने अधिकारियों से समस्या की ली विस्तृत जानकारी
एसडीएम राजकुमार ने अधिकारियों से समस्या की विस्तृत जानकारी ली तथा अंडरपास की स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने कहा कि यह मामला आम जनता की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा है. समस्या के स्थायी समाधान के लिए रेल मंत्रालय एवं संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई कर जल्द से जल्द लोगों को इस परेशानी से राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अंडरपास में जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था कर इसे सुरक्षित बनाया जाए, ताकि लोगों को हर बारिश में जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने की मजबूरी से मुक्ति मिल सके.
