मंदार पर्वत पर अर्जुन को मिला था विजय का वरदान! सिद्ध सेनानी मां दुर्गा की आराधना से जागी थी महाभारत की विजयी शक्ति

Mandar History : धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीकृष्ण के निर्देश पर अर्जुन ने मंदारवासिनी सिद्ध सेनानी मां दुर्गा की आराधना की थी. देवी की कृपा से उन्हें युद्ध में विजय का आशीर्वाद मिला और महाभारत में अद्भुत पराक्रम दिखाया.

बौसी, (बांका) से संजीव पाठक की रिपोर्ट

Mandar History : बांका जिले का ऐतिहासिक मंदार पर्वत केवल समुद्र मंथन और धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि शक्ति साधना की प्राचीन एवं सिद्ध भूमि भी माना जाता है. स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, महाभारत युद्ध से पहले अर्जुन ने यहीं मां सिद्ध सेनानी दुर्गा की आराधना कर विजय का वरदान प्राप्त किया था. इसी कारण आज भी यह स्थल शक्ति उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

महाभारत से जुड़ी है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, महाभारत के भीष्मपर्व में वर्णित प्रसंग के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध शुरू होने से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया. कथा के अनुसार, गीता का श्रवण करने के बाद भी जब अर्जुन युद्ध के लिए तैयार हुए तो उनके हाथों से गांडीव धनुष नहीं उठ सका. तब श्रीकृष्ण ने उन्हें मंदारवासिनी मां दुर्गा की आराधना करने का निर्देश दिया.

मां सिद्ध सेनानी की कृपा से मिला विजय का आशीर्वाद

स्थानीय परंपराओं के अनुसार, अर्जुन ने मंदार पर्वत पर विराजमान मां सिद्ध सेनानी, कामचारिणी देवी की आराधना और स्तुति की. मान्यता है कि देवी की कृपा से उनके हाथों में गांडीव पुनः आ गया और तरकस से बाण निकलने लगे. इसके बाद अर्जुन ने महाभारत युद्ध में अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए विजय प्राप्त की.

शक्ति उपासना की आदि भूमि माना जाता है मंदार

Mandar History : धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंदार पर्वत पर स्थित कामचारिणी योनि स्थल को मूल भगवती का प्राचीन निवास माना जाता है, जिसे बड़ी दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है. ऐसी भी मान्यता है कि असम स्थित प्रसिद्ध कामाख्या धाम इसी शक्ति परंपरा का विस्तार है. इसी कारण मंदार क्षेत्र को शक्ति साधना की आदि एवं सिद्ध भूमि के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है.

चारों दिशाओं में फैले हैं प्राचीन शक्ति पीठ

मंदार क्षेत्र के चारों ओर स्थित अनेक प्राचीन देवी मंदिर और शक्ति पीठ इसकी आध्यात्मिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं. इनमें संथाल परगना का दस महाविद्या क्षेत्र, तेलडीहा माता का सिद्ध पीठ, नारायणपुर की ब्राह्मणी देवी, अंग क्षेत्र की मनसा देवी, लक्ष्मीपुर का भुवनेश्वरी काली मंदिर, पंजवारा दुर्गा मंदिर, सबलपुर दुर्गा मंदिर तथा लखपुरा का काली मंदिर प्रमुख माने जाते हैं.

इतिहासकार भी बताते हैं शक्ति साधना का केंद्र

इतिहासकार उदयेश रवि और स्थानीय विद्वानों के अनुसार, मंदार क्षेत्र केवल धार्मिक स्थलों का समूह नहीं, बल्कि शक्ति साधना, तपस्या और आध्यात्मिक सिद्धियों की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है. यही कारण है कि आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां सिद्ध सेनानी की पूजा-अर्चना करते हैं. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से साहस, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

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Published by: Pintu Pranav

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