बांका से चंदन कुमार की रिपोर्ट
Mandar Ashtkamal Temple : बांका जिले के बौंसी प्रखंड स्थित ऐतिहासिक मंदार की तराई में अवस्थित अष्टकमल मंदिर में गुरुवार को भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की गई. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की. दिनभर मंदिर परिसर और पापहारिणी सरोवर का वातावरण भक्तिमय बना रहा.
सुबह से मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
गुरुवार सुबह पांच बजे मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया. पापहारिणी सरोवर के बीच स्थित अष्टकमल मंदिर में भगवान विष्णु के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. सुबह 7:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान की आरती हुई, जबकि दोपहर 12 बजे विशेष भोग अर्पित किया गया. इसके बाद भगवान के शयन के उपरांत दोपहर एक बजे मंदिर के पट पुनः श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए.
पीले फूल, चना दाल और हल्दी से की गई पूजा
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु को पीले फूल, गुड़, चने की दाल, चावल, हल्दी और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की. धार्मिक मान्यता है कि गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है.
शाम को पापहारिणी तट पर हुई महाआरती
संध्या 6:30 बजे पापहारिणी सरोवर के तट पर भव्य महाआरती का आयोजन किया गया. महाआरती के बाद भगवान को भोग अर्पित किया गया और शाम 7:30 बजे के बाद मंदिर के पट बंद कर दिए गए. आरती के दौरान मंदिर परिसर "जय श्रीहरि" और "विष्णु भगवान की जय" के जयघोष से गूंज उठा.
केले के पेड़ की भी हुई पूजा
गुरुवार के विशेष अवसर पर जिले के विभिन्न मंदिरों और घरों में केले के पेड़ की पूजा भी की गई. धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है. इस दिन केले के वृक्ष की पूजा और भगवान विष्णु का व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, स्वास्थ्य लाभ मिलता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होती है नियमित पूजा
मंदिर के पुजारी भुवनेश्वर उर्फ भवेश झा, विभूति पाठक और लखन झा ने बताया कि अष्टकमल मंदिर में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार और पूरी विधि-विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है. उन्होंने बताया कि मंदिर में नियमित आरती, भोग और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का पालन परंपरागत तरीके से किया जाता है.
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