आस्था और उल्लास के साथ जारी है मधुश्रावणी पर्व, छठे दिन नवविवाहिताओं ने की विधि-विधान से पूजा

आस्था और उल्लास के साथ जारी है मधुश्रावणी पर्व, छठे दिन नवविवाहिताओं ने की विधि

पंजवारा (बांका) : मिथिला की लोक-संस्कृति और अटूट आस्था के महापर्व मधुश्रावणी की धूम इन दिनों पूरे मिथिलांचल में मची हुई है. नवविवाहिताओं के लिए यह पर्व अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना का सबसे बड़ा अनुष्ठान माना जाता है. इसी कड़ी में पर्व के छठे दिन नवविवाहिताओं ने पूरी निष्ठा, श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ पूजा-अर्चना की. ​अखंड सौभाग्य की कामना का प्रतीक है मधुश्रावणी ​सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि से शुरू होकर शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि तक यानी कुल 13 दिनों तक चलने वाले इस मधुश्रावणी व्रत का विशेष महत्व है. पर्व के छठे दिन नवविवाहिताओं ने सुहाग के गीतों के बीच मां गौरी, भगवान शिव और विषहरा (नाग देवता) की विधि-विधान से पूजा की. ​मान्यता है कि इस अनुष्ठान को करने से नवविवाहिता को अखंड सौभाग्य का वरदान मिलता है और उनके जीवनसाथी की रक्षा होती है. पूजा के दौरान महिलाएं प्रतिदिन टेका (कथा) सुनती हैं और एक-दूसरे को सुहाग का आशीर्वाद देती हैं. ​पारंपरिक गीतों से गूंज रहा मिथिला का कोना-कोना ​मधुश्रावणी पर्व के दौरान पूरा मिथिलांचल लोकगीतों से सराबोर हो गया है. नवविवाहित युवतियां टोली बनाकर पारंपरिक मैथिली सुहाग गीत"जय विषहरा मैया...मधुश्रावणी के बरतिया हे सखी...गाते हुए पूजा स्थल तक पहुंचती हैं. इस दौरान सखियों और सास-ननद का साथ इस पर्व के उल्लास को और भी बढ़ा देता है. छठे दिन की पूजा को लेकर नवविवाहिताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. नए परिधानों में सजी-धजी व्रती महिलाओं ने भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को बेलपत्र, फूल, दूब और विभिन्न प्रकार के नैवेद्य अर्पित किए. ​प्रकृति से जुड़ा है यह अनोखा पर्व ​मिथिलांचल की संस्कृति में रचे-बसे इस पर्व की खासियत यह है कि इसमें प्रकृति की पूजा का विशेष विधान है. भुइयां बाबा, विषहरा, महादेव और गौरी की पूजा में बांस के बने बर्तन, टेसू के फूल, विभिन्न प्रकार के पत्ते और मिट्टी से बनी मूर्तियों का उपयोग किया जाता है, जो मिथिला की प्राचीन लोक-संस्कृति और प्रकृति प्रेम का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है. ​


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लेखक के बारे में

By गौरव कश्यप

गौरव कश्यप प्रिंट माध्यम में 14 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. पंजवारा (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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