सात दशक बाद भी अधूरी आस : लोहागढ़ नदी पर नहीं बना पुल, हर बारिश में कट जाता है गांव का संपर्क

Lohagarh River Bridge : सात दशक बीत जाने के बाद भी बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड के बंधुडीह गांव के लोगों का लोहागढ़ नदी पर पुल बनने का सपना अधूरा है. हर साल बरसात में गांव का संपर्क मुख्य सड़क से कट जाता है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती-किसानी पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, जबकि विभाग ने इसी वित्तीय वर्ष में निर्माण शुरू होने का दावा किया है.

शंभुगंज (बांका) से ठाकुर बिनोद का रिपोर्ट

Lohagarh River Bridge : बांका जिले के शंभुगंज प्रखंड की परमानंदपुर पंचायत अंतर्गत बंधुडीह गांव के लोगों का लोहागढ़ नदी पर पुल बनने का सपना आजादी के सात दशक बाद भी अधूरा है. करीब एक हजार से अधिक आबादी वाला यह गांव हर वर्ष बरसात में मुख्य सड़क से कट जाता है. इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई, किसानों की आजीविका और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका.

बारिश में टूट जाता है गांव का संपर्क

ग्रामीणों के अनुसार गर्मी और सर्दी के मौसम में लोग किसी तरह नदी पार कर मालडीह गांव के रास्ते अस्पताल, प्रखंड कार्यालय, अंचल कार्यालय, हाट-बाजार और सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन तक पहुंच जाते हैं. हालांकि उस समय भी भारी सामान लेकर नदी पार करना जोखिम भरा रहता है. लेकिन बरसात शुरू होते ही लोहागढ़ नदी उफान पर आ जाती है और गांव का संपर्क पूरी तरह टूट जाता है. ऐसे में लोग अपने ही गांव में सीमित होकर रह जाते हैं.

स्कूली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

साइकिल लेकर नदी पार करती छात्रा.

पुल नहीं होने का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है. सामान्य दिनों में जहां विद्यार्थियों को विद्यालय पहुंचने के लिए करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, वहीं बरसात में भूमिहारा और भरतशिला होकर लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त सफर करना पड़ता है. अधिक दूरी और कठिन रास्ते के कारण कई छात्र-छात्राएं नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है.

खेती और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित

गांव की अधिकांश आबादी खेती-किसानी पर निर्भर है. बरसात के दौरान पुल नहीं होने से किसान अपनी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पाते. वहीं किसी के बीमार होने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनने से बंधुडीह के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के लोगों को भी आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी.

वर्षों से मिल रहा आश्वासन

नदी पार करते बच्चे.

ग्रामीण रणवीर यादव, मिथलेश कुमार, शंभुनाथ यादव, नकुल यादव, बुद्धदेव यादव, अमित कुमार और संजय यादव सहित अन्य लोगों ने बताया कि पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार सांसद, विधायक और संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई गई. पूर्व में तत्कालीन लघु जल संसाधन मंत्री और वर्तमान स्थानीय विधायक ने भी पुल निर्माण का भरोसा दिया था. प्रशासनिक स्वीकृति और टेंडर प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई, लेकिन वर्षों बाद भी काम शुरू नहीं हो सका.

विभाग का दावा- इसी वित्तीय वर्ष शुरू होगा निर्माण

स्थानीय विधायक एवं पूर्व मंत्री जयंत राज ने कहा कि कुछ तकनीकी कारणों से लोहागढ़ नदी पर पुल का निर्माण अब तक शुरू नहीं हो सका. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही बंधुडीह गांव के पास पुल निर्माण कराया जाएगा. वहीं ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता रवि कुमार ने बताया कि पुल निर्माण की सभी प्रक्रियाएं लगभग पूरी कर ली गई थीं, लेकिन कुछ कारणों से टेंडर रद्द करना पड़ा. उन्होंने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में पुल निर्माण कार्य शुरू कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, जिससे वर्षों से इंतजार कर रहे ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है.

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Author: Amit Kumar Sinh

Published by: Amit Kr Sinha

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