Banka News : बाराहाट प्रखंड की पंजवारा पंचायत अंतर्गत नगरी जानुकित्ता गांव आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहा है. आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गांव तक पहुंचने के लिए केवल पगडंडियां और कच्चे रास्ते ही सहारा हैं. ग्रामीणों का कहना है कि विकास की योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं.
350 की आबादी रोज झेल रही परेशानी
करीब 350 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को सड़क नहीं होने के कारण हर दिन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय जनप्रतिनिधि पक्की सड़क का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है. इससे लोगों में गहरा असंतोष है.
बरसात में कीचड़ से कट जाता है गांव
ग्रामीण सुगो मंडल, अजीत मंडल, प्रवीण कुमार पासवान, अर्जुन मंडल, गंगाधर मांझी, मणी पासवान, मोती पासवान और प्रकाश मांझी ने बताया कि बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता पूरी तरह कीचड़ में बदल जाता है. ऐसे में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और गांव का संपर्क मुख्य सड़क से लगभग टूट जाता है.
इलाज, पढ़ाई और खेती पर पड़ रहा असर
सड़क नहीं होने का सबसे अधिक असर स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ रहा है. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है. कई बार वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते, जिससे मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. वहीं स्कूली बच्चों को रोज कीचड़ भरे रास्ते से होकर विद्यालय जाना पड़ता है. किसानों को भी अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च और परेशानी का सामना करना पड़ता है.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार जिला प्रशासन, स्थानीय विधायक और पंचायत प्रतिनिधियों को सड़क निर्माण के लिए आवेदन दे चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो गांव के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
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