नगर पंचायत की लापरवाही- कूड़ा ढोने वाली ठेला गाड़ी खुले में सड़ रही, सफाई व्यवस्था पर संकट

ठेला गाड़ी खुले में सड़ रही, सफाई व्यवस्था पर संकट

फोटो 25 बौंसी 1. जिला परिषद मार्केट के शौचालय समीप खुले में खराब हो रहा हाथ ठेला

प्रतिनिधि, बौंसी

नगर पंचायत के विकास के लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है. साथ ही नगर की बेहतर साफ-सफाई के के लिए उपकरणों की खरीद के लिए राशि भी उपलब्ध करा रही है. लेकिन नगर पंचायत के लापरवाही से लाखों रुपए की लागत से खरीदे गये यह उपकरण खुले में धूप बारिश में पड़ी पड़ी खराब हो रही है. नगर पंचायत की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है. कूड़ा ढोने के लिए उपयोग की जाने वाली महत्वपूर्ण ठेला गाड़ियां खरीदने के बाद से खुले में धूप–बारिश में पड़ी-पड़ी खराब हो रही हैं. हालात ये हैं कि कई ठेला गाड़ियों के पहिए जाम हो गये हैं, लोहे के हिस्सों में जंग लग चुका है और कुछ गाड़ियां काम करने की स्थिति में ही नहीं बची हैं. नगर पंचायत के लोगों का कहना है कि नगर पंचायत द्वारा इन गाड़ियों को सुरक्षित रखने के लिए न तो कोई शेड बनाया गया है और न ही नियमित मरम्मत कराई जा रही है. इतना ही नहीं खरीद के बाद से इन वाहनों को अब तक चलाया भी नहीं गया है.

बाजार के जिला परिषद मार्केट स्थित शौचालय समीप करीब डेढ़ दर्जन से ज्यादा हाथ ठेला गाड़ी खुले में पड़ी हुई है. जिस पर अब घास भी निकल आये हैं तथा इनमें अब धीरे-धीरे जंग लगना शुरू हो गया है. नगर वासियों का कहना है कि नगर पंचायत लाखों रुपये की गाड़ियां खरीदता है, लेकिन उनकी देखरेख शून्य है. सब कुछ खुले में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है.

दो दर्जन ठेला की हुई थी खरीदारी

मालूम हो कि टेंडर के जरिए करीब 2 वर्ष पूर्व दो दर्जन हाथ ठेला की खरीदारी नगर पंचायत बौंसी के द्वारा करीब 15 से 20 लाख रुपए की लागत से की गयी थी. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गाड़ियों को सुरक्षित शेड दिया जाय और नियमित ग्रीसिंग और मरम्मत की जाए तो ये वर्षों तक चल सकती हैं. लेकिन वर्तमान स्थिति में नगर पंचायत को जल्द ही नई गाड़ियां खरीदनी पड़ सकती हैं, जिससे जनता के करदाताओं के पैसे का भारी नुकसान होगा. इतना ही नहीं इसके नहीं रहने से सफाई कर्मचारी परेशान होंगे और वार्डों में कूड़ा उठाने का काम प्रभावित होगा. ऐसे में प्रतीत होता है कि नगर पंचायत के द्वारा केवल पैसों के बंदर बांट के लिए इसकी खरीद की गयी. जबकि इसकी उपयोगिता सिद्ध नहीं हो रही है.

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By SHUBHASH BAIDYA

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