आइटी की नौकरी छोड़ अमर ने बांका में उगाये सेब, सात एकड़ बंजर जमीन को बनाया समेकित खेती का मॉडल

Farmer Amar Pal Success Story : आइटी की नौकरी छोड़ बांका के अमर पाल ने कर दिखाया कमाल. सात एकड़ खेत में उगाये सेब, केला, अनार और बना दिया प्रेरक कृषि मॉडल.

मुख्य बातें

बांका से विभांशु कुमार की रिपोर्ट

Farmer Amar Pal Success Story : जिस बांका जिले में कभी सेब की खेती की कल्पना भी मुश्किल मानी जाती थी, वहां एक किसान ने अपनी मेहनत, वैज्ञानिक सोच और नवाचार से नयी मिसाल कायम कर दी है. सदर प्रखंड के समुखियामोड़ के समीप किसान अमर पाल ने आइटी सेक्टर की नौकरी छोड़कर सात एकड़ बंजर जमीन को समेकित खेती के सफल मॉडल में बदल दिया है. सबसे खास बात यह है कि उनके लगाये गये सेब के पौधों में अब फल आने लगे हैं.

आइटी की नौकरी छोड़ खेती को चुना करियर

करीब चार से पांच वर्ष पहले अमर पाल ने आइटी सेक्टर की नौकरी छोड़ खेती को अपना भविष्य बनाने का फैसला लिया था. उस समय कई लोगों ने इसे जोखिम भरा कदम बताया था, लेकिन उन्होंने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती पर भरोसा बनाए रखा. आज उनकी मेहनत रंग ला रही है और उनका फार्म जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है.

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Farmer Amar Pal Success Story : बांका की धरती पर फल देने लगे सेब के पौधे

अमर पाल ने अपने फार्म में करीब 60 सेब के पौधे लगाए थे. अब इन पौधों में फल आने की शुरुआत हो चुकी है. बांका जैसे गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में सेब के पौधों का फल देना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और यह वैज्ञानिक खेती की संभावनाओं को भी दर्शाता है.

एक ही फार्म में फल, सब्जियां और डेयरी का संगम

छोटे पौधे में उगे सेब, केले का बागान व डेयरी फार्म की तस्वीर.

अमर पाल के समेकित खेती मॉडल में केवल सेब ही नहीं, बल्कि केला, अनार, आम, अमरूद और काजू जैसे कई फलदार पौधे भी शामिल हैं. इसके साथ ही मौसम के अनुसार सब्जियों और मसालों की खेती की जाती है. खेती के साथ डेयरी को जोड़कर उन्होंने अतिरिक्त आय का मजबूत स्रोत तैयार किया है.

ड्रिप सिंचाई और सरकारी योजनाओं का मिला सहारा

फार्म में सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उन्हें कृषि विभाग की ड्रिप सिंचाई योजना का लाभ मिला है. इसके अलावा केले की खेती के लिए भी विभागीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है. अमर पाल का कहना है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है.

गोबर से तैयार वर्मी कम्पोस्ट से हो रही प्राकृतिक खेती

फार्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राकृतिक खेती है. अमर पाल रासायनिक उर्वरकों के बजाय डेयरी से मिलने वाले गोबर से तैयार वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करते हैं. इससे खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और उत्पाद अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बनते हैं.

नौकरी से ज्यादा सुकून खेती में मिलता है

अमर पाल बताते हैं कि आइटी सेक्टर की नौकरी छोड़ना आसान निर्णय नहीं था, लेकिन आज उन्हें खेती से अच्छी आमदनी के साथ मानसिक संतुष्टि भी मिल रही है. उनका कहना है कि प्रकृति के बीच रहकर काम करने का आनंद और सुकून किसी भी कॉरपोरेट नौकरी से कहीं अधिक है.

युवाओं और किसानों के लिए बन रहे प्रेरणास्रोत

अमरूद का बागान.

बांका जैसे क्षेत्र में सेब के पौधों का फल देना इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक तकनीक, सही प्रबंधन और मेहनत के साथ नयी फसलों में भी सफलता प्राप्त की जा सकती है. अमर पाल का समेकित खेती मॉडल अब जिले के किसानों और युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है.

खेती को बनाया रोजगार और समृद्धि का माध्यम

अमर पाल का फार्म यह संदेश देता है कि खेती केवल पारंपरिक पेशा नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ रोजगार और समृद्धि का मजबूत माध्यम बन सकती है. उनका प्रयास उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो खेती को नए नजरिए से देखना चाहते हैं.

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Published by: Amit kumar sinh

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