चांदन में गांवों तक जाने वाली संपर्क-सड़क हुई जर्जर, ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी
बिरनियां पंचायत की करीब आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाली सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. लोग जान जोखिम में रखकर हिचकोले खाते हुए आवागमन करने को विवश हैं. इस सड़क पर हमेशा दुर्घटना की आशंका रहती है.
प्रखंड के बिरनियां पंचायत क्षेत्र के करीब आधा दर्जन गांवों को जोड़ने वाली संपर्क-सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है. जिससे इस रास्ते से होकर लोग जान जोखिम में रखकर हिचकोले खाते हुए आवागमन करने को विवश हैं. हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रह रही है. क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन व विभागीय अधिकारियों से शीघ्र जर्जर संपर्क-सड़क की मरम्मती कराने की मांग की है. प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली संपर्क-सड़क जर्जर हो चुकी है. जर्जर सड़क से होकर इलाके के लोग जान जोखिम में रखकर हिचकोले खाते हुए सफर करने को मजबूर हैं. इस परिस्थिति में हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रह रही है. शाम ढलने या बारिश होने के बाद यह समस्या चौगुनी हो जाती है. वहीं विभागीय अधिकारी समस्या से बेखबर बने हुए हैं.
आधा दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ती है सड़क
प्रखंड के बिरनियां पंचायत के आधा दर्जन से अधिंक गांवों को जोड़ने वाली संपर्क पथ के जर्जर होने से आमजन परेशान हैं. जगह-जगह बने छोटे-बड़े गड्ढों से होकर बाइक सहित दुपहिया, तिपहिया व चार पहिया वाहनों से आवागमन करने में लोगों को कठिनाई हो रही है. इस सड़क पर दुर्घटना की संभावना प्रबल होती जा रही है. अधिकांश लोग जर्जर सड़क की बजाय बगल के कच्ची पथ से गुजरने को विवश हैं.
समूचे रास्ते पर उभर आया है पत्थर
विदित हो कि जर्जर सड़क से गिट्टी व अलकतरा लगभग हट चुका है. पत्थर के उभर जाने से आवागमन में परेशानी हो रही है. पांडेयडीह-लाहाबन मुख्य सड़क से नीलकोठी प्राथमिक विद्यालय के पास से लुरीटांड, छबेला, तेलियामारन, ठाकुरबाड़ी, भलशुंभीया आदि गांवों के लोग आवागमन करते हैं. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से बनी यह सड़क पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है.
ग्रामीणों ने की मरम्मत कराने की मांग
विदित हो कि जर्जर सपंर्क-सड़क से आदिवासी बाहुल गांवों का जुड़ाव है. बावजूद इसके क्षेत्र के जनप्रतिनिधि व विभागीय अधिकारी उदासीन बने हुए हैं. ग्रामीणों ने बांका जिला प्रशासन से शीघ्र जर्जर सड़क की मरम्मती कराने की मांग की है. मांग करने वालों में ग्रामीण आनंदी राय, सुनील राय, नरेश यादव, लीलाधर यादव, बिरंची यादव, गौरी यादव आदि शामिल हैं.
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