प्रतिनिधि, बौंसी. नगर पंचायत गठन के तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद बौंसी को अब तक एक व्यवस्थित बस स्टैंड की सौगात नहीं मिल सकी है. नतीजतन, स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले यात्रियों को सड़क किनारे ही बसों का इंतजार करने और वहीं से सफर शुरू करने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है. मुख्य बाजार और व्यस्त सड़कों पर वाहनों के रुकने से दिनभर सुचारू यातायात प्रभावित रहता है और जाम की समस्या आम हो गई है. वहीं, व्यस्त सड़कों पर उतरने-चढ़ने के दौरान दुर्घटना की आशंका भी लगातार बनी रहती है. धार्मिक और पर्यटन केंद्र होने के बाद भी बुनियादी सुविधा शून्य धार्मिक, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों के कारण बौंसी जिले के प्रमुख नगरों में शामिल है. मंदार पर्वत समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. इसके बावजूद यात्रियों के लिए अब तक आधुनिक बस पड़ाव की व्यवस्था नहीं हो पाई है. इससे नगर की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है. मौसम की मार भी यात्रियों की परेशानी बढ़ा रही है. बरसात में कीचड़ और जलजमाव के बीच बस का इंतजार करना पड़ता है, जबकि गर्मी और सर्दी में खुले आसमान के नीचे खड़े रहने की विवशता बनी रहती है. बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाई, निर्माण की मांग महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. स्थाई स्टैंड नहीं होने के कारण प्रतीक्षालय, शौचालय, शुद्ध पेयजल, पार्किंग और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं. प्रबुद्ध नागरिकों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से अविलंब बौंसी में आधुनिक एवं सुविधायुक्त बस स्टैंड का निर्माण कराने की पुरजोर मांग की है. उनका मानना है कि इससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, नगर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी और जाम से राहत मिलेगी.
तीन साल बाद भी बस स्टैंड का सपना अधूरा, सड़क पर सफर शुरू करने को मजबूर बौंसी के यात्री
बौंसी नगर पंचायत गठन के तीन साल बाद भी बस स्टैंड नहीं बना है। यात्री सड़क किनारे खड़े होने को मजबूर हैं, जिससे जाम और दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

फोटो कैप्शन :बाजार मे सड़क के किनारे खड़े लोग | Prabhat Khabar Network