Banka News: बांका जिले के बाराहाट प्रखंड स्थित निर्वाचन कार्यालय में पिछले पांच-छह वर्षों से प्रतिनियुक्त एक डाटा ऑपरेटर को लेकर विवाद गहरा गया है. जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं ने संबंधित कर्मी वरुण कुमार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर मूल विद्यालय में वापस भेजने की मांग की है. मामला निर्वाचन जैसे संवेदनशील कार्य से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है.
वर्षों से एक ही कार्यालय में तैनाती पर उठे सवाल
बाराहाट प्रखंड मुख्यालय स्थित निर्वाचन कार्यालय में कार्यरत डाटा ऑपरेटर वरुण कुमार के बारे में आरोप है कि वे पिछले पांच-छह वर्षों से लगातार उसी कार्यालय में प्रतिनियुक्त हैं.
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि निर्वाचन कार्य में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोपरि होती है. ऐसे में किसी एक कर्मी का लंबे समय तक एक ही कार्यालय में बने रहना प्रशासनिक दृष्टि से भी सवाल खड़ा करता है.
BDO से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सचिदानंद साह ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) गोपाल कुमार गुप्ता से मामले में तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है.
उन्होंने कहा कि निर्वाचन कार्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. यदि क्षेत्र में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने संबंधित कर्मी को उनके मूल विद्यालय में वापस भेजने का आग्रह किया.
BEO और शिक्षकों के साथ व्यवहार पर भी आपत्ति
राजद के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव ने भी डाटा ऑपरेटर की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि निर्वाचन कार्य में शिक्षक और बीएलओ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
यदि उन्हें किसी कर्मी के व्यवहार से परेशानी हो रही है, तो प्रशासन को पूरे मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों के साथ समन्वयपूर्ण व्यवहार आवश्यक है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी खोला मोर्चा
सामाजिक कार्यकर्ता गौतम यादव ने कहा कि हाल के दिनों में कई बीएलओ ने उनसे संबंधित कर्मी के व्यवहार को लेकर शिकायत की है.
उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन कार्य से जुड़े कर्मियों के साथ कथित तौर पर रूखा व्यवहार किया जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने भी वरुण कुमार की प्रतिनियुक्ति तत्काल समाप्त कर मूल विद्यालय में योगदान कराने की मांग की.
प्रतिनियुक्ति की अवधि को लेकर विवाद
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वरुण कुमार पहले पथरा विद्यालय में टोला सेवक के पद पर कार्यरत थे. निर्वाचन कार्यालय में उनकी प्रतिनियुक्ति कुछ समय के लिए की गई थी, लेकिन इसके बाद वे लंबे समय से उसी कार्यालय में कार्य कर रहे हैं.
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इसी लंबे कार्यकाल के कारण उनकी कार्यशैली और कार्यालयी व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं.
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई और संबंधित कर्मी की प्रतिनियुक्ति समाप्त नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे.
अब इस पूरे विवाद में नजरें प्रखंड प्रशासन पर टिकी हैं कि निर्वाचन जैसे संवेदनशील विभाग से जुड़े इस मामले में जांच होती है या नहीं और प्रशासन क्या निर्णय लेता है.
