ऐतिहासिक खोजरी पहाड़ पर खनन की तैयारी से ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

स्वतंत्रता सेनानियों की ऐतिहासिक धरोहर खोजरी पहाड़ पर खनन की तैयारी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. जानिए क्यों यह पहाड़ पर्यावरण के लिए है महत्वपूर्ण.

Mining Row: शंभुगंज (बांका). शंभुगंज प्रखंड की गुलनी-कुशहा पंचायत स्थित ऐतिहासिक खोजरी पहाड़ अब प्रस्तावित खनन लीज को लेकर चर्चा के केंद्र में है. राज्य मंत्रिमंडल से खनन की मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रिया शुरू हो गई है. इसके विरोध में स्थानीय ग्रामीणों ने इसे क्षेत्र की ऐतिहासिक और पर्यावरणीय विरासत पर खतरा बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.

स्वतंत्रता सेनानियों की शरणस्थली रहा है खोजरी पहाड़

शहीद शशि प्रसाद सिंह के परिजन रंजीत सिंह ने बताया कि आजादी की लड़ाई के दौरान खोजरी पहाड़ क्रांतिकारियों की सुरक्षित शरणस्थली हुआ करता था. उन्होंने कहा कि गर्म दल (परशुराम दल) के सियाराम ब्रह्मचारी, शीलधर सिंह सहित कई स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से बचने के लिए इसी पहाड़ पर शरण लेते थे. वहीं नरम दल के सियाराम सिंह, शशि प्रसाद सिंह और विश्वनाथ सिंह सहित कई स्वतंत्रता सेनानियों का भी इस स्थान से गहरा संबंध रहा है.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था सम्मेलन का उद्घाटन

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1936 के फरवरी माह में भागलपुर जिला कांग्रेस कमेटी का चतुर्थ सम्मेलन खोजरी पहाड़ पर आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन का उद्घाटन देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया था. पहाड़ की चोटी पर आज भी एक प्राचीन भवन के भग्नावशेष मौजूद हैं, जिनका वर्ष 2009 में तत्कालीन भागलपुर जिलाधिकारी ने निरीक्षण भी किया था.

पर्यावरण और जल संरक्षण पर भी संकट की आशंका

करीब 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस पहाड़ पर हजारों पेड़-पौधे मौजूद हैं, जो स्थानीय पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ के पूर्वी हिस्से में जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से गारलैंड एनीकट का निर्माण कराया गया है. ऐसे में खनन से पर्यावरण के साथ जल संरक्षण परियोजना भी प्रभावित हो सकती है.

ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

Mining Row: स्थानीय लोगों ने स्पष्ट कहा है कि यदि खोजरी पहाड़ की खनन लीज को अंतिम मंजूरी दी गई तो ग्रामीण एकजुट होकर व्यापक आंदोलन करेंगे. उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को नष्ट नहीं होने दिया जायेगा.

खनन विभाग ने कही यह बात

जिला खनन पदाधिकारी बलवंत सिंह ने बताया कि खनन लीज से संबंधित प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी.


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लेखक के बारे में

By ठाकुर विनोद कुमार

ठाकुर विनोद कुमार प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. शंभूगंज (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं.

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