Banka News: बांका जिले के कटोरिया क्षेत्र में श्रावणी मेला अपने चरम पर पहुंच चुका है. मेला के तीसरे दिन तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने शिवभक्तों की कठिन परीक्षा ली, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी अटूट आस्था और भक्ति के सामने मौसम की चुनौती भी छोटी पड़ गई. कंधे पर कांवर, जुबां पर ‘बोलबम’ और मन में बाबाधाम पहुंचने की लालसा लिए हजारों कांवरिये लगातार पैदल आगे बढ़ते रहे.
कटोरिया से गुजरने वाला कांवरिया पथ शनिवार को पूरी तरह केसरियामय नजर आया. कहीं श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ रहे थे, तो कहीं कांवरियों की टोली ढोल-मंजीरे की धुन पर बाबा भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए यात्रा कर रही थी.
‘हाथी ना घोड़ा ना कोई सवारी’ से गूंजा कांवरिया पथ
तेज धूप के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी. यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में कांवरिये प्रसिद्ध शिव-भजन ‘हाथी ना घोड़ा ना कोई सवारी, पैदल ही अइबो तोर दुआरी, हो भोलेनाथ’ गाते और दोहराते हुए आगे बढ़ते रहे.
यह भजन कांवर यात्रा की आस्था और समर्पण का प्रतीक बनकर पूरे मार्ग में गूंजता रहा. नंगे पैर चल रहे श्रद्धालुओं के चेहरे पर थकान जरूर थी, लेकिन बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की इच्छा उनके कदमों को लगातार आगे बढ़ा रही थी.
तपती राहों पर भी नहीं डिगी श्रद्धा
कई श्रद्धालुओं ने बताया कि लंबी पैदल यात्रा, गर्मी और उमस के बावजूद उन्हें किसी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं होती. उनका कहना था कि हर कदम पर बाबा का नाम लेने से नई ऊर्जा मिलती है और वही शक्ति उन्हें बाबाधाम की ओर खींचे ले जा रही है.
श्रद्धालुओं के अनुसार बाबा बैद्यनाथ के दर्शन की आस्था के आगे रास्ते की कठिनाइयां और मौसम की चुनौतियां बहुत छोटी हैं.
सेवा शिविरों में मिल रही राहत
कांवरिया पथ पर जगह-जगह लगाए गए सेवा शिविर श्रद्धालुओं के लिए राहत का बड़ा सहारा बने हुए हैं. इन शिविरों में कांवरियों को ठंडा पानी, शीतल पेय, फल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में सेवा शिविरों में जुटे हैं और दिन-रात श्रद्धालुओं की सेवा में लगे हुए हैं. गर्मी से राहत मिलने के बाद कांवरिये फिर नए उत्साह के साथ अपनी यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं.
Banka News: बोलबम के जयकारों से शिवमय हुआ वातावरण
कटोरिया क्षेत्र का पूरा कांवरिया मार्ग इन दिनों ‘बोलबम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज रहा है. हजारों श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही के कारण पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है.
श्रावणी मेला के इस दौर में कांवरियों की आस्था, सेवा शिविरों की व्यवस्था और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने पूरे इलाके को शिवमय बना दिया है. तपती धूप में भी बिना किसी वाहन के पैदल चल रहे श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के प्रति अपने समर्पण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं.
