बांका में किसानों के लिए कृषि वानिकी योजना शुरू: हर पौधे पर मिलेंगे ₹70 वापस, 31 जुलाई तक आवेदन का मौका

Agroforestry Scheme: बांका जिले के किसानों के लिए बिहार सरकार की कृषि वानिकी योजना शुरू हो गई है. इस योजना के तहत, आप ₹10 का निवेश करके 3 साल में ₹70 का रिटर्न पा सकते हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई है.

Agroforestry Scheme: बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से बांका जिले के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और हरित क्षेत्र का दायरा बढ़ाने के लिए 'कृषि वानिकी (अन्य प्रजाति) योजना' के तहत आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अपनी निजी कृषि भूमि या खेतों की मेड़ पर आर्थिक रूप से मूल्यवान पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है. वन विभाग ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि इच्छुक किसान आगामी 31 जुलाई तक मंदार तराई स्थित वन कार्यालय में अपने आवेदन जमा कर सकते हैं.

₹10 का निवेश, 3 साल बाद ₹70 का रिटर्न: समझें गणित

इस योजना की सबसे आकर्षक कड़ी किसानों को मिलने वाली वित्तीय प्रोत्साहन राशि है, जो उनकी दीर्घकालिक आय का जरिया बनेगी:

  • सुरक्षित जमा राशि: किसानों को शुरुआत में वन विभाग की नर्सरी से पौधा लेते समय मात्र ₹10 प्रति पौधा की दर से सुरक्षित राशि (सिक्योरिटी मनी) नकद या ऑनलाइन जमा करनी होगी.
  • ₹70 की वापसी: पौधरोपण के 3 वर्ष पूरे होने के बाद, यदि खेतों में लगाए गए पौधों में से 50 प्रतिशत या उससे अधिक पौधे जीवित पाए जाते हैं, तो सरकार प्रति पौधा ₹60 प्रोत्साहन राशि देगी. इसके साथ ही शुरुआत में जमा किए गए ₹10 भी वापस कर दिए जाएंगे. इस प्रकार कुल ₹70 प्रति पौधा सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर (डीबीटी) कर दिया जाएगा.

इमारती लकड़ी से लेकर फलदार पौधों तक का विकल्प

योजना के तहत किसानों को खेतों की मिट्टी और पर्यावरण के अनुकूल कई लाभदायक और बहुउपयोगी प्रजातियों के पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं:

  • इमारती और छायादार पौधे: महोगनी, सागौन (टीक), शीशम, कदम और नीम.
  • फलदार पौधे: आम, अमरूद, आंवला और जामुन.

ये पौधे खेतों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी के कटाव को रोकेंगे, भू-जल स्तर में सुधार करेंगे और भविष्य में बहुमूल्य लकड़ी के रूप में किसानों को अतिरिक्त मोटी कमाई देंगे.

Agroforestry Scheme: आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया

फारेस्टर विद्यासागर ने बताया कि योजना का लाभ लेने की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाया गया है. किसान समय सीमा के भीतर निम्नलिखित प्रक्रिया पूरी कर लें:

  1. आवेदन स्थल: इच्छुक किसानों को निर्धारित आवेदन पत्र भरकर आवश्यक दस्तावेजों के साथ मंदार तराई के समीप बने वन कार्यालय (या स्थानीय वन परक्षेत्र कार्यालय) में जमा करना होगा.
  2. जरूरी कागजात: आवेदन फॉर्म के साथ जमीन का स्वामित्व प्रमाण पत्र (एलपीसी या हालिया रसीद), बैंक पासबुक की छायाप्रति और पहचान पत्र के तौर पर [Aadhaar Redacted] की फोटोकॉपी संलग्न करना अनिवार्य है.
  3. अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तय की गई है. इस तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

वन विभाग ने क्षेत्र के तमाम पात्र और इच्छुक किसानों से अपील की है कि वे इस मानसून सीजन में इस योजना का अधिकतम लाभ उठाएं. इससे न केवल उनकी बंजर या कम उपजाऊ भूमि का बेहतर व्यावसायिक उपयोग होगा, बल्कि पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के संवर्धन में भी बांका जिला अग्रणी भूमिका निभा सकेगा.

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लेखक के बारे में

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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