बांका : लगतार छह दिन से जारी बारिश ने सोमवार को दोपहर बाद विराम लिया. अलबत्ता कई दिनों के बाद लोगों ने राहत की सांस लेते हुए सूर्य के भी दर्शन कुछ क्षण के लिये किये. बारिश बंद होने के बाद चांदन व ओढ़नी का जलस्तर कम होता गया. लिहाजा, तटबंध टूटने के बाद बन रहे बाढ़ का खतरा भी टल गया है. लगातार हुई रिमझिम बारिश से भारी मात्रा में तालाब, पोखर व डैम में पानी जमा हो गया है. कृषि विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक 25 से 30 सितंबर तक रिकार्ड तोड़ 279.47 मिली मीटर वर्षा हुयी है.
बारिश थमने से मिली राहत, टला बाढ़ का खतरा
बांका : लगतार छह दिन से जारी बारिश ने सोमवार को दोपहर बाद विराम लिया. अलबत्ता कई दिनों के बाद लोगों ने राहत की सांस लेते हुए सूर्य के भी दर्शन कुछ क्षण के लिये किये. बारिश बंद होने के बाद चांदन व ओढ़नी का जलस्तर कम होता गया. लिहाजा, तटबंध टूटने के बाद बन […]

जबकि सितंबर माह के सामान्य वर्षापात 208.8 एमएम के विपरीत कहीं ज्यादा 377.47 एमएम बारिश दर्ज की गयी है. यानि की 25 से 30 सितंबर के बारिश ने सितंबर माह की कमी पूरी कर दी. जानकारों के मुताबिक यह बारिश किसानों के लिए राहत भरी रही. जिस खरीफ धान में सिंचाई की आवश्यकता थी, वह इस बारिश ने पूरी कर दी है. वहीं तालाब व डैम में जमा पानी आगे रबी गेहूं की खेती में लाभकारी सिद्ध हो सकता है.
दूसरी ओर बारिश शांत होने के बाद जिला प्रशासन ने भी राहत की सांस ली है. दरअसल, चांदन तटबंध के कई जगह से दरकने के बाद डर पैदा हो गया था. अलबत्ता, डीएम ने स्वयं तटबंध का निरीक्षण का 24 घंटा निगरानी का निर्देश दिया था. यही नहीं भारी बारिश को लेकर मंगलवार तक सभी स्कूल व कॉलेज को भी बंद करते हुए सरकारी पदाधिकारी व कर्मियों की छुट्टी रद्द कर दी थी.
डीएम ने देर शाम किया चांदन तटबंध का निरीक्षण
डीएम कुंदन कुमार व एसपी अरविर कुमार गुप्ता ने सोमवार को देर शाम जिला मुख्यालय से निकट बांका-ढाकामोढ़ मुख्य मार्ग के चांदन नदी पुल समीप तटबंध का निरीक्षण किया. इसके बाद लकड़ीकोला की तरफ भी जांच को लेकर गये. वहीं मौजूद सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता को तटबंध मरम्मति को लेकर कई निर्देश दिये. कहा कि बारिश का कोई ठिकाना नहीं है.
बारिश की संभावना अभी भी है. अलबत्ता, पूरी टीम तटबंध की मजबूती पर जुटे रहे. ज्ञात हो कि डीएम के निर्देश के बाद तटबंध मजबूती का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है. बोरा बालू तैयार कर स्टॉक किया जा रहा है. जबकि जरुरत के मुताबिक तटबंध की मजबूती के लिए बोरा बालू लगाया जा रहा है.