सृजन का फर्जीवाड़ा . तत्कालीन डीएलओ, बैंक प्रबंधक सहित सृजन के पदधारकों के खिलाफ प्राथमिकी
सृजन घोटाला में एक बार फिर बड़ी राशि गबन का मामला उजागर हुआ है. प्रशासनिक जांच टीम की ओर से भू-अर्जन पदाधिकारी आदित्य कुमार झा ने बुधवार को बांका थाने में 18 करोड़ गबन को लेकर तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी जयश्री ठाकुर, तत्कालीन नाजिर मो अनीस अंसारी, बांका को-ऑपरेटिव बैंक के तत्कालीन प्रबंधक, भागलपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक के तत्कालीन प्रबंधक के साथ सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के सभी पदधारक व सहयोगियों पर प्राथमिकी दर्ज करायी है.
बांका : 155 पृष्ठ में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 2009 व 14 के बीच स्थायी व अस्थायी ढंग से नियम को ताक पर रख सरकारी राशि निकासी व जमा करायी गयी. इस दौरान 18 करोड़ का बैंक से लेन-देन हुआ, जिसका एक भी साक्ष्य संबंधित विभाग के पंजी में अंकित नहीं है. नतीजतन, जांच टीम को 18 करोड़ राशि गबन का मामला पकड़ में आया है. वहीं दूसरी ओर प्राथमिकी दर्ज होते ही पुलिस प्रशासन एक बार फिर एक्सन में आ गया है.
जानकारी के मुताबिक सृजन मामले को लेकर दूसरी जांच 29 अगस्त देर शाम तक पूरी की गयी. इसके बाद प्राथमिकी की कार्रवाई पूरी की गयी है. डीएम कुंदन कुमार इस मामले पर खुद नजर बनाए हुए थे. उन्होंने डीडीसी के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम को जांच का दारोमदार सौंपा था. एसपी चंदन कुमार कुशवाहा ने भी प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए गठित एसआइटी को केस सौंप दिया है.
प्राथमिकी में दो नये आरोपितों की पहचान : सृजन घोटाले का तार बांका से जुड़ने के बाद तीव्र गति से जांच की कार्रवाई शुरू की गयी. पहली जांच प्रक्रिया में 83.10 करोड़ गबन को लेकर 20 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. बुधवार को हुई दूसरी प्राथमिकी में दो नए अभियुक्तों का नाम जुटा है. जानकारी के मुताबिक संदेह पर सहकारिता बैंक को भी खंगाला गया. जांच क्रम में भारी अनियमितता सामने आयी. नतीजतन तत्कालीन सहकारिता बैंक प्रबंधक पर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी. भू-अर्जन विभाग के तत्कालीन नाजिर अनीस अंसारी को भी इस बार मुख्य आरोपित बनाया गया है. सूत्र की मानें तो 2002-13 के बीच नाजिर ने राशि गबन में प्रमुख भूमिका निभायी थी. आरोपितों पर 420, 409, 467, 468, 475 व 120 बी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई.
पहले 83.13 करोड़ के गबन की हुई थी प्राथमिकी
सृजन घोटाला मामले को लेकर बांका में बुधवार को प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. दर्ज प्राथमिकी के अनुसार 18 करोड़ की वित्तीय अनियमितता का मामला उजगार हुआ है. इस दौरान स्थायी व अस्थायी ढंग से नियम के विरुद्ध विभागीय खाते से सरकारी राशि निकासी व जमा करायी गयी है. सेंट्रल को-ऑपरेटिव भागलपुर के बांका शाखा में छह करोड़ की राशि जमा करा दी गयी थी. लेकिन, अज्ञात खाता से जमा राशि भी नियम के विरुद्ध है. लिहाजा, 18 करोड़ गबन को लेकर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. घटित एसआइटी को केस की जिम्मेदारी सौंप दी गयी है.
चंदन कुमार कुशवाहा, एसपी, बांका
सृजन घोटाले को लेकर एक और प्राथमिकी बांका थाना में दर्ज करायी गयी है. गठित जांच टीम ने त्वरित कार्रवाई कर निष्पक्षता से जांच की प्रक्रिया पूरी की है. जांच क्रम में भू-अर्जन विभाग 31 बैंक खातों की जांच की गयी. को-ऑपरेटिव बैंक बांका शाखा में 12 करोड़ की राशि की निकासी व जमा गलत ढंग से किया गया था. इसमें छह करोड़ की राशि बैंक खाता में पुन: डाल दी गयी थी. यह भी नियम के विरुद्ध है. इन सभी मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.
कुंदन कुमार, डीएम, बांका
