गरीब व लाचार मरीजों को नि:शुल्क वाहन सुविधा उपलब्ध करा रही है पूनम
बाराहाट : कहते हैं जब जोश व जुनून साथ मिल जाये, तो कोई भी काम असंभव नहीं होता. ऐसा ही कुछ इन दिनों अपने ऑटो से फर्राटा भरती हुई पूनम देवी ने कर दिखायी है. अपने जोश व जुनून के बल पर ही गरीबी को मात देते हुए पूनम ने गरीबी से दो-दो हाथ करने का फैसला किया व आज लोगों के लिए एक उदाहरण बन कर सामने आयी है. साथ ही अपने इस जुनून के बल पर ही अपने पूरे परिवार का भरण पोषण कर रही है.
पूनम देवी मूल रूप से भागलपुर जिला के जगदीशपुर गोराडीह प्रखंड के सारथ गांव की रहने वाली हैं, जो इन दिनों बाराहाट व उसके आसपास के क्षेत्रों में वाहन चालकों व आमजनों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं. पूनम देवी अपने ऑटो से लोगों को गंतव्य स्थान तक पहुंचाने के साथ-साथ माल ढुलाई भी कर रही है. बातचीत के दौरान पूनम देवी ने बताया कि गरीबी व मुसीबत के मारे सभी सगे-संबंधियों ने जब साथ छोड़ दिया, तो उसने पति के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की ठानी व पति के सहयोग से ही चंद दिनों में ऑटो चलाना सीख गयी.
इसके बाद से उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज वह झारखंड के जरमुंडी में अपने एक लड़के व एक लड़की की पढ़ाई के साथ-साथ पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही है. मंगलवार को भी बाराहाट-दुमका मुख्य मार्ग पर एक छोटी-सी मुलाकात के दौरान पूनम देवी ने अपनी जिंदगी की जद्दोजहद के बारे में बताया कि आज भी जब उसके गांव में कोई गरीब व प्रसूता पैसे के अभाव में वाहन नहीं कर सकते हैं या उसे सरकारी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती है तो तत्काल वह अपने ऑटो से उसे अस्पताल या फिर दूसरी जगह नि:शुल्क पहुंचाती हैं. इस काम से उन्हें अपूर्व संतुष्टि मिलती है. उन्होंने बताया कि जब उसने वाहन चलाने का फैसला किया,
तो समाज के कई लोगों ने इसे घृणा की दृष्टि से देखा है. साथ ही तरह-तरह की बाधाएं डाली, लेकिन मैंने ईमानदारीपूर्वक अपने काम को किया. इसके बल पर आज वह इस मुकाम पर पहुंच चुकी हैं. उन्होंने ईमानदारी से किये गये किसी भी काम को छोटा नहीं होने की बात बतायी. साथ ही सफलता के मूल मंत्र को बताते हुए कहा कि जिंदगी में अगर सफलता पानी हो, तो ईमानदारी पूर्वक मन लगाकर काम करना चाहिए.
