औरंगाबाद में विश्वकर्मा पूजा की धूम: सजे बाजार, रमेश चौक से मुख्य मार्केट तक उमड़ी खरीदारों की भीड़, वाहनों और मशीनों की होगी विशेष पूजा

औरंगाबाद में 7 सितंबर को मनाई जाने वाली विश्वकर्मा पूजा की तैयारी जोरों पर है। शहर के बाजार सज गए हैं और व्यापारी खुश हैं। वाहनों, गैरेजों और तकनीकी संस्थानों में खास उत्साह देखा जा रहा है।

Aurangabad News: 17 सितंबर को मनाए जाने वाले शिल्प और निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा के पूजनोत्सव को लेकर औरंगाबाद का बाजार पूरी तरह सज-धज कर तैयार हो गया है. बुधवार की सुबह से ही शहर के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र रमेश चौक, पुरानी जीटी रोड और मुख्य बाजार में खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. पूजन सामग्री, फल, धूप-दीप, गेंदा फूल की मालाओं, रंगीन रिबन और सजावटी झालरों की दुकानों पर देर शाम तक ग्राहकों की आवाजाही लगी रही, जिससे स्थानीय दुकानदारों के चेहरे खिल उठे.

वाहनों, गैरेजों और तकनीकी संस्थानों में तैयारियां तेज

विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर शहरभर में तकनीकी उपकरणों और वाहनों की विधिवत पूजा-अर्चना को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है:

  • वाहनों की सफाई व सजावट: बाइक, ई-रिक्शा, ऑटो से लेकर ट्रक, बस और ट्रैक्टर जैसे कमर्शियल वाहनों को धोकर चमकाया जा रहा है. वाहन मालिक और चालक इन्हें मालाओं और रिबन से सजाने की तैयारी में जुटे हैं.
  • कल-कारखानों व गैरेजों में अनुष्ठान: विभिन्न वर्कशॉप, औद्योगिक इकाइयों, प्रिंटिंग प्रेसों और गैरेजों में मशीनों, औजारों और तकनीकी उपकरणों की विशेष पूजा की जाएगी.
  • भंडारे व प्रसाद की व्यवस्था: कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कामगारों और कर्मचारियों के लिए सामूहिक पूजन के साथ महाप्रसाद और भंडारे का प्रबंध किया गया है.

कई स्थानों पर स्थापित होंगी भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमाएं

शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में विभिन्न सार्वजनिक पूजा समितियों और श्रमिक संगठनों द्वारा भगवान विश्वकर्मा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं. गुरुवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, जिसके बाद दिनभर दर्शन, हवन और प्रसाद वितरण का दौर चलेगा.

निर्माण व शिल्प के देवता से कारोबार में तरक्की की कामना

तकनीक और निर्माण से जुड़े हर वर्ग के लिए विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक और व्यावसायिक रूप से बड़ा महत्व है.

"भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम शिल्पकार और यंत्रों का देवता माना जाता है. कारीगर, इंजीनियर, मिस्त्री और वाहन चालक इस दिन अपने औजारों और मशीनों को विश्राम देकर उनकी आराधना करते हैं. मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर मशीनों में कोई बाधा नहीं आती और सालभर कारोबार व रोजगार में उन्नति बनी रहती है." — स्थानीय पुजारी एवं श्रद्धालु, औरंगाबाद

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By सुधीर कुमार सिन्हा

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