वित्त रहित शिक्षकों की पीड़ा : अनुदान नहीं, वेतनमान चाहिए, अगस्त में होगा अनिश्चितकालीन आंदोलन

अनुदान नहीं वेतनमान फोरम के तहत देव के सूर्यनारायण इटंर कॉलेज में बैठक कर तैयार की आगे रणनीति

अनुदान नहीं वेतनमान फोरम के तहत देव के सूर्यनारायण इटंर कॉलेज में बैठक कर तैयार की आगे रणनीति

प्रतिनिधि, देव/कुटुबा.

सरकार की वित्त रहित शिक्षा नीति की समाप्ति और रिजल्ट आधारित अनुदान की योजना महज छलावा है. वर्षों से त्रासदी का दंश झेल रहे शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकार द्वारा लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है. अब वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं. ये बातें बुधवार को अनुदान नहीं, वेतनमान फोरम के बैनर तले देव के सूर्य कॉलेज में आयोजित बैठक में प्रदेश स्तर के नेताओं ने कहीं. बैठक की अध्यक्षता जिला संयोजक अरविंद कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन प्राचार्य अनिल कुमार सिंह ने किया. बैठक में प्रदेश संयोजक प्रो रौशन कुमार ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने हमारी जायज मांगों पर गौर नहीं किया, तो हम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे. यह समय निर्णायक है अभी नहीं तो कभी नहीं. उन्होंने कहा कि शिक्षक अब गर्दनीबाग में बैठकर गर्दन नहीं फंसायेंगे, बल्कि विधान परिषद और सरकार को सीधे घेरेंगे.

पुरानी व्यवस्था में भारी विसंगतियाँ

फोरम के सह-संयोजक आचार्य शिव कुमार पाठक ने कहा कि वित्त रहित शिक्षा नीति एक कलंकित व्यवस्था बन गयी है, जिसमें तत्काल सुधार की जरूरत है. भूमि और भवन की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद ऐसे शिक्षण संस्थानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है, जबकि बगैर आधारभूत संरचना वाले कई प्राइमरी स्कूलों को मिडिल और फिर प्लस टू स्कूलों में अपग्रेड कर दिया गया.

गरीब बच्चों को पढ़ाने में निभाई बड़ी भूमिका

मगध प्रमंडल के संयोजक प्रो. विजय चौबे ने कहा कि आज से 20 वर्ष पहले प्रखंड स्तर के सरकारी स्कूलों में इंटर की पढ़ाई नहीं होती थी. हर पंचायत में हाई स्कूल नहीं था. उस समय गरीब, मजदूर और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को शिक्षा से वंचित होना पड़ता था. ऐसे हालात में शिक्षा प्रेमियों ने निजी प्रयासों से स्कूल और कॉलेज खोले, जिससे घर-घर शिक्षा की अलख जगी. उन्होंने कहा कि आज उन्हीं संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है, जो दुखद है. बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अगस्त माह में पटना में अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जायेगा.

मदरसा और संस्कृत स्कूलों को लाभ, फिर भी उपेक्षित हैं निजी शिक्षक

फोरम के माध्यमिक विंग के संयोजक रणजीत कुमार और सारण कोऑर्डिनेटर बृजेश कुमार ने कहा कि समाज के केवल दो प्रतिशत बच्चों को पढ़ाने वाले मदरसा और संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों को सातवां वेतनमान मिल रहा है, जबकि 60% से अधिक बच्चों को पढ़ाने वाले वित्त रहित स्कूल और कॉलेजों के शिक्षकों को अभी तक वेतनमान नहीं मिला है. यह सरासर अन्याय है. जिला उप-संयोजक प्रो. श्याम पाठक, महिला कॉलेज के प्राचार्य दिनेश कुमार सिंह, प्रो सुनील कुमार, प्रो प्रमोद पांडेय सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि जब राज्य में शैक्षणिक संसाधनों की भारी कमी थी, तब इन शिक्षकों ने ईमानदारी से काम कर बिहार को गौरवान्वित किया.

ये हैं शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रमुख मांगें

अनुदान नहीं, पूर्ण वेतनमान दिया जाये, पहले के बकाये अनुदान की एकमुश्त राशि का भुगतान हो, सेवानिवृत्त कर्मियों की आयुसीमा में वृद्धि की जाये, सेवा शर्तें लागू की जाये और सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित हो, पटना हाईकोर्ट के वेतन एवं पेंशन से संबंधित न्यायादेश को लागू किया जाये, फोरम के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो वे सड़क से लेकर सदन तक व्यापक आंदोलन करेंगे. इस अवसर पर प्राचार्य विनय कुमार सिंह, डाॅ रामईकबाल पाठक, प्रो सुनील कुमार, प्रो प्रमोद सिंह, नवीन मिश्र, सुदर्शन दास, अंजु कुमारी, कंचन कुमारी, चंदन मिश्रा, मुखदेव पासवान, नीता कुमारी, दिनेश कुमार सहित जिले के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और कर्मचारी मौजूद थे.

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By Sujit kumar

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