अंबा. रसोई गैस सिलिंडर की किल्लत अब लोगों के लिए परेशानी बनती जा रही है. सरकार और प्रशासन की ओर से गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. गैस सिलिंडर के लिए लोगों को लंबे इंतजार और कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं. अब शहरी क्षेत्र में 25 दोनों पर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 45 दिन बाद ऑनलाइन नंबर मिल रहा है. इसके बाद भी पांच से सात दिन का अतिरिक्त इंतजार करना पड़ रहा है. ऐसे में रसोई का पूरा काम प्रभावित हो रहा है. उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन तो मिला, लेकिन अब समय पर रिफिल नहीं मिलने से योजना का लाभ अधूरा नजर आ रहा है. जिन परिवारों के पुरुष सदस्य बाहर कमाने गए हैं, वहां घर में रह रही महिलाओं को ऑनलाइन नंबर लगाने से लेकर गैस एजेंसी तक जाने और सिलिंडर लाने में भारी कठिनाई उठानी पड़ रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि एजेंसी पर घंटों लाइन में लगने के बाद भी कई बार सिलेंडर नहीं मिल पाता. मजबूरी में उन्हें बार-बार चक्कर लगाना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है. स्थिति यह हो गयी है कि कई परिवार फिर से कोयला, लकड़ी, गोइठा और पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाने लगे हैं.
कोयले की बिक्री बढ़ी
पिछले दिनों की अपेक्षा कोयले की बिक्री दोगुनी से भी अधिक हो गई है. कोयला दुकानदार ने बताया कि पिछले दिनों पूरे दिन में दो से चार ग्राहक ही कोयला खरीदने के लिए आते थे. शादी विवाह तथा अन्य समारोह के साथ-साथ होटल एवं हॉस्टल का खाना भी गैस चूल्हा पर ही पकता था, अब आसानी से सिलिंडर उपलब्ध नहीं होने के कारण एक बार फिर पहले की बिक्री बढ़ने लगी है. शादी विवाह एवं अन्य समारोह में भोजन फिर से कोयला पर पक रहे हैं.
