औरंगाबाद ग्रामीण. मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 अभियान को सफल बनाने और आम लोगों को वैकल्पिक विवाद समाधान की प्रक्रिया से जोड़ने के उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से शुक्रवार को विशेष जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. जागरूकता रथ को जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने रवाना किया. इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित, सरल और सौहार्दपूर्ण निस्तारण के लिए मध्यस्थता एक प्रभावी माध्यम है. उन्होंने निर्देश दिया कि सभी न्यायालय अपने-अपने क्षेत्र के सुलहनीय वादों को चिह्नित कर जिला विधिक सेवा प्राधिकार को प्रेषित करें, ताकि प्रशिक्षित मध्यस्थों के माध्यम से पक्षकारों के बीच सहमति स्थापित कर मामलों का निस्तारण कराया जा सके. उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी का कोई सुलहनीय दीवानी वाद, उपभोक्ता विवाद, चेक बाउंस का मामला, पारिवारिक विवाद या पूर्व वाद से संबंधित कोई मामला लंबित है, तो वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार अथवा संबंधित न्यायालय से संपर्क कर मध्यस्थता के माध्यम से समाधान करा सकते हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता की पूरी प्रक्रिया पूर्णतः निःशुल्क है और इसमें समय व धन दोनों की बचत होती है. कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विश्वविभूति गुप्ता सहित कई न्यायिक पदाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल उपस्थित रहीं. सचिव ने बताया कि जागरूकता रथ जिले के सभी क्षेत्रों में भ्रमण कर मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 के तहत लोगों को मध्यस्थता के लाभों से अवगत करायेगा और अधिक से अधिक लोगों को अपने विवादों के समाधान के लिए प्रेरित करेगा. उन्होंने बताया कि मध्यस्थता के तहत दीवानी वाद, चेक बाउंस के मामले, पारिवारिक विवाद समेत ऐसे सभी मामलों का समाधान संभव है, जिनमें दोनों पक्षों की सहमति हो. इस पहल का उद्देश्य न केवल मामलों का शीघ्र निस्तारण करना है, बल्कि पक्षकारों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध बनाये रखना भी है.
मध्यस्थता राष्ट्र के लिए 2.0 को सफल बनाने निकला जागरूकता रथ
जन-जन तक पहुंचेगा मध्यस्थता का संदेश, निःशुल्क मिलेगी विवाद समाधान की सुविधा
