औरंगाबाद के बेलहरिया स्कूल की बदहाल सड़क बनी खतरा,जान जोखिम में डालकर 350 बच्चें पहंच रहे, दिव्यांग शिक्षक भी हुए हादसे का शिकार

रफीगंज के मध्य विद्यालय बेलहरिया में रास्ता न होने से शिक्षक और छात्र परेशान हैं। कीचड़ और गहरी खाई पार कर स्कूल पहुंचना मजबूरी बन गई है। प्रशासन से मांग जारी है।

रफीगंज प्रखंड के मध्य विद्यालय बेलहरिया में आवागमन का रास्ता नहीं होने से विद्यार्थियों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. पौथु से करीब तीन किलोमीटर दूर पचरुखिया मुख्य पथ पर स्थित इस विद्यालय में सड़क से उतरते ही कीचड़ और पानी के बीच से होकर परिसर तक पहुंचना पड़ता है. बरसात के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है.

स्कूल के बगल से नहर गुजरती है. विद्यालय परिसर में जाने के लिए सड़क से उतरते ही करीब आठ फीट गहरी खाई है. बारिश के दिनों में यह खाई पानी से भर जाती है. इससे विद्यालय तक पहुंचने वाला अस्थायी रास्ता भी डूब जाता है. पानी भरने के बाद रास्ते और गड्ढे का पता नहीं चलता. ऐसे में छोटे बच्चों के नहर में गिरने और डूबने का खतरा बना रहता है.

कीचड़ में पार होते छात्र छात्राएं

दिव्यांग शिक्षक भी हो चुके हैं हादसे का शिकार

विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि स्कूल में एक शिक्षक दिव्यांग हैं और बैसाखी के सहारे चलते हैं. करीब 15 दिन पहले पानी से होकर विद्यालय आने के दौरान वह डूबने लगे थे. खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने उन्हें बाहर निकालकर उनकी जान बचायी. किसी तरह रास्ता पार कर विद्यालय पहुंचने के बाद उन्हें गंदे कपड़ों में ही पूरा दिन स्कूल में बिताना पड़ा. शिक्षकों के अनुसार, ऐसी स्थिति में बच्चों और शिक्षकों को पूरे दिन असहज रहना पड़ता है.

इस विद्यालय में बेलहरिया, पोखर बिगहा, दुर्जन बिगहा, सिवा सहित आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों के लगभग 350 बच्चे पढ़ते हैं. विद्यालय का परिसर मुख्य सड़क के स्तर से नीचे है. ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण नहर और खेतों का पानी अक्सर विद्यालय के सामने से होकर गुजरता है. हल्की बारिश होने पर पानी का बहाव और तेज हो जाता है.

सड़क पर बाइक छोड़कर स्कूल जाते हैं शिक्षक

रास्ता खराब होने के कारण विद्यालय के शिक्षक अपनी बाइक मुख्य सड़क पर ही छोड़ देते हैं. इसके बाद पानी और कीचड़ के बीच से होकर स्कूल पहुंचते हैं. प्रधानाध्यापक मिथिलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि विद्यालय तक रास्ता बनाने की समस्या से जिला पदाधिकारी और विभाग को अवगत कराया गया है. इसके बावजूद अब तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है.

उन्होंने बताया कि ग्रामीण भी विद्यालय में आने-जाने के लिए रास्ता बनवाने की मांग कर रहे हैं. सड़क से विद्यालय तक महज करीब 200 मीटर रास्ता बना दिया जाये तो समस्या का समाधान हो सकता है.

विद्यालय की सचिव रजन्ति देवी, सत्येंद्र शर्मा, अशोक चंद्रवंशी, रविंद्र शर्मा सहित ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी से विद्यालय तक रास्ता बनवाने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता बनने से बच्चों और शिक्षकों को बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ के बीच से होकर स्कूल जाने की मजबूरी से राहत मिलेगी.


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By सतेंद्र पाठक

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