Aurangabad News : औरंगाबाद बिहार सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त किए जाने के कथित प्रयासों के विरोध में बुधवार को किशोरी सिन्हा महिला महाविद्यालय, औरंगाबाद के शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन किया. शिक्षकों ने महाविद्यालय परिसर में एकजुट होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की.
स्वायत्तता को बताया उच्च शिक्षा की आत्मा
शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता उच्च शिक्षा व्यवस्था की आत्मा है. इससे शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर होती है और शिक्षकों व विद्यार्थियों को अकादमिक स्वतंत्रता के साथ शोध, नवाचार तथा ज्ञान के विकास का अवसर मिलता है. उन्होंने कहा कि स्वायत्तता लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत करती है और उच्च शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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निर्णय से शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव
प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि यदि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले निर्णय लागू किए जाते हैं तो इसका प्रतिकूल असर शिक्षा व्यवस्था, शैक्षणिक वातावरण और संस्थानों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली पर पड़ेगा. उन्होंने सरकार से अपील की कि उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले शिक्षकों, शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय प्रशासन और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जाए.
शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से दर्ज कराया विरोध
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में है. उनका उद्देश्य केवल उच्च शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता, गरिमा और शैक्षणिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है.
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सभी शिक्षकों ने दिखाई एकजुटता
कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे. सभी ने काली पट्टी बांधकर एकजुटता का परिचय दिया और सरकार से विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता अक्षुण्ण रखने की मांग की. शिक्षकों ने विश्वास जताया कि सरकार उनकी भावनाओं और सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा उच्च शिक्षा व्यवस्था के हित में संतुलित और सर्वसम्मत निर्णय लेगी.
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