संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ विकसित करना शिक्षकों की जिम्मेदारी : एसडीओ अमित राजन

Aurangabad News : दाउदनगर बीएड कॉलेज में एसडीओ अमित राजन ने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को संविधान के अधिकारों के साथ उनके कर्तव्यों का भी बोध कराएं.

Aurangabad News : दाउदनगर स्थित भगवान प्रसाद शिवनाथ प्रसाद बीएड कॉलेज में बीएड सत्र 2026-28 के उन्मुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि एसडीओ अमित कुमार राजन, विशिष्ट अतिथि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी, कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार तथा संस्थापिका श्रीमती उर्मिला किरण ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम की शुरुआत बीएड सत्र 2025-27 की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत 'मां शारदे कहां तू वीणा बजा रही है' से हुई. इसके बाद छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को आकर्षक बनाया.

शिक्षक केवल पढ़ाएं ही नहीं, जिम्मेदार नागरिक भी तैयार करें : एसडीओ

मुख्य अतिथि एसडीओ अमित कुमार राजन ने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं. उनका दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता का बोध कराना भी है. उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक को विद्यार्थियों को भारतीय संविधान के विभिन्न आयामों से परिचित कराना चाहिए. लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इन अधिकारों का प्रयोग संविधान और कानून की मर्यादा के भीतर रहकर ही किया जाना चाहिए.

मौलिक अधिकारों के साथ कर्तव्यों का पालन भी जरूरी

एसडीओ ने कहा कि मौलिक अधिकारों का अर्थ यह नहीं है कि अपनी मांगों को लेकर हिंसा की जाए या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाए. संविधान नागरिकों को अधिकार देने के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का भी निर्धारण करता है. इसलिए मौलिक अधिकारों के साथ मौलिक कर्तव्यों का अध्ययन और पालन भी आवश्यक है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है. भावी शिक्षकों को विद्यार्थियों में संविधान के प्रति सम्मान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना विकसित करनी चाहिए, ताकि वे अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी ईमानदारी से निर्वहन कर सकें.

संवाद से ही प्रभावी बनती है शिक्षा : डॉ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी

विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्ञानदेव मणि त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के प्रति पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करना चाहिए. बच्चे अपने शिक्षक के प्रति जो विश्वास और व्यवहार विकसित करते हैं, वही शिक्षक की वास्तविक सफलता होती है. उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य का रिश्ता अत्यंत पवित्र होता है. उन्होंने शिक्षकों की तुलना उस बाज से की, जिसे यह पता होता है कि अपने बच्चों को किस दिशा में ले जाकर उन्हें आगे बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यालयों में केवल सूचना देने का कार्य न करें, बल्कि विद्यार्थियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित करें. गुरु-शिष्य के बीच संवाद के बिना शिक्षा की प्रक्रिया प्रभावी नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि यदि कक्षा में बच्चे सवाल पूछना शुरू कर दें, तो समझना चाहिए कि शिक्षक अपने दायित्व में सफल हो रहा है. प्रश्न पूछना जिज्ञासा और समझ का प्रतीक है.

छात्र-छात्राओं ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में स्वीटी कुमारी, रेखा कुमारी, मंतोष कुमार, अविनाश कुमार और मयंक राज सहित कई छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं. इस अवसर पर व्याख्याता रामचंद्र यादव, निशांत कुमार, अनूप कुमार कनौजिया, अखिलेश सिंघेल, सत्या कुमारी, रचना कुमारी, सलोनी कुमारी, विकास कुमार सहित कॉलेज के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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By Om Prakash

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