Aurangabad News : उद्घाटन के करीब 19 महीने बीत जाने के बाद आखिरकार दाउदनगर अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला के संचालन की कवायद अब तेज हो गई है. मंगलवार को प्रयोगशाला का ताला खोला गया और पूरे परिसर की व्यापक रूप से साफ-सफाई कराई गई. विभागीय स्तर पर अब यह दावा किया जा रहा है कि प्रयोगशाला का संचालन विधिवत शुरू कर दिया गया है और जल्द ही क्षेत्र के किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच की जाएगी.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद में प्रतिनियुक्त कृषि समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह और संत कुमार को इस प्रयोगशाला के संचालन के लिए विशेष रूप से जिला स्तर से दाउदनगर भेजा गया है. दोनों कर्मियों ने मंगलवार को प्रयोगशाला पहुंचकर परिसर की साफ-सफाई का कार्य पूरा कराया. उनके द्वारा यह जानकारी दी गई कि अब प्रयोगशाला का संचालन शुरू हो चुका है और बहुत जल्द किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने एकत्रित कर जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
17 फरवरी 2025 को हुआ था ऑनलाइन उद्घाटन
उल्लेखनीय है कि गत 17 फरवरी 2025 को बिहार के तत्कालीन कृषि मंत्री मंगल पांडेय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दाउदनगर अनुमंडल स्तरीय मिट्टी जांच प्रयोगशाला का भव्य उद्घाटन किया था. स्थानीय स्तर पर तत्कालीन एसडीओ, एसडीपीओ और जिला कृषि पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से शिलापट्ट का अनावरण किया गया था.
इस प्रयोगशाला के शुरू होने से दाउदनगर, ओबरा, गोह और हसपुरा प्रखंड के हजारों किसानों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी मिट्टी की जांच कराने की बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी. हालांकि, उद्घाटन के लंबे समय बाद भी प्रयोगशाला नियमित रूप से संचालित नहीं हो सकी थी और अनुमंडल क्षेत्र के किसानों को मिट्टी की जांच के लिए अपने नमूने जिला मुख्यालय स्थित प्रयोगशाला भेजने पड़ रहे थे.
प्रभात खबर की खबर के बाद उठी सक्रियता
इस गंभीर समस्या को लेकर 'प्रभात खबर' ने 10 सितंबर को डिजिटल संस्करण और 11 सितंबर 2026 के समाचार पत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था. उस दौरान औरंगाबाद के सहायक निदेशक (रसायन) ने एक-दो सप्ताह के भीतर प्रयोगशाला को पूरी तरह चालू कराने की बात कही थी, जिसके बाद अब इसके संचालन की जमीनी कवायद शुरू हो गई है.
हालांकि, विभागीय स्तर पर प्रयोगशाला शुरू होने का दावा तो किया जा रहा है, लेकिन इसके सुचारू और स्थाई संचालन को लेकर स्थायी कर्मियों की तैनाती का सवाल अभी भी पूरी तरह बना हुआ है. सूत्रों के अनुसार, प्रयोगशाला के सुचारू संचालन के लिए सहायक निदेशक (रसायन), लैब टेक्नीशियन और लैब असिस्टेंट सहित करीब 10 पदाधिकारी एवं कर्मियों की आवश्यकता है. अभी तक किसी की भी स्थायी तैनाती नहीं की गई है और फिलहाल प्रतिनियुक्ति के सहारे ही व्यवस्था आगे बढ़ाने की तैयारी चल रही है.
फिलहाल प्रखंड कृषि पदाधिकारी प्रक्षेत्र को इसका प्रभार सौंपे जाने की जानकारी मिल रही है, लेकिन 19 महीने बाद ही सही, इस प्रयोगशाला के चालू होने की पहल से स्थानीय किसानों के चेहरे पर राहत की उम्मीद जरूर जगी है.