औरंगाबाद के एसडीएम गौरव सिंह बुधवार को मदनपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक उमंगेश्वरी धर्मस्थल पहुंचे, जहां उन्होंने उमंगेश्वरी दरबार एवं प्रसिद्ध सूर्य मंदिर का बारीकी से निरीक्षण किया. इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने मंदिर परिसर के विकास, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और श्रद्धालुओं के लिए मिलने वाली सुविधाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों तथा स्थानीय प्रबंधन समिति को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
स्थानीय लोगों ने रखी समस्याएं, एसडीएम ने दिया आश्वासन
निरीक्षण के क्रम में स्थानीय लोगों और पुजारियों ने एसडीएम को कई महत्वपूर्ण समस्याओं से अवगत कराया, जिनमें मुख्य रूप से सूर्य मंदिर में लगे पत्थरों के टूटने व खिसकने की समस्या, पेयजल की भारी कमी, शौचालय की अपर्याप्त व्यवस्था, धर्मशाला, पर्याप्त लाइटिंग और श्रद्धालुओं के लिए शेड के निर्माण की मांग शामिल थी.
इस पर एसडीएम गौरव सिंह ने कहा कि ऐतिहासिक उमगा पर्वत की प्राकृतिक बनावट अत्यंत आकर्षक है और धार्मिक दृष्टिकोण से यह स्थल काफी महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि इस स्थल का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है, जिसे संरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी है. एसडीएम ने मंदिर में लगे पत्थरों के खिसकने एवं टूटने की समस्या को बेहद गंभीरता से लेते हुए इसके शीघ्र मरम्मत और वैज्ञानिक संरक्षण के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया.
पेयजल, स्वच्छता और रखरखाव के दिए निर्देश
एसडीएम ने मंदिर के ऊपरी हिस्से तक पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा आगामी आयोजनों एवं मेलों के मद्देनजर श्रद्धालुओं के लिए शौचालय व ठहरने की बेहतर व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए.
उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा पूर्व में विवाह मंडप एवं शौचालय का निर्माण कराया गया है, लेकिन इन सुविधाओं का नियमित उपयोग और रखरखाव सुनिश्चित करना स्थानीय समिति की मुख्य जिम्मेदारी है.
उन्होंने निर्देश दिया कि परिसर के शौचालय हमेशा चालू स्थिति में रहने चाहिए तथा उनकी नियमित साफ-सफाई के लिए एक समर्पित कर्मी की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जाए.
इसके अलावा, उन्होंने स्थानीय लोगों से मंदिर परिसर एवं आसपास की अन्य कमियों को लेकर एक लिखित आवेदन देने को कहा, ताकि उन समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर कराया जा सके.
इस अवसर पर सदर एसडीपीओ-2 आदित्य कुमार, मंदिर के पुजारी विष्णु पाठक, दिलीप पाठक, धनंजय सिंह सहित कई गणमान्य लोग और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे.
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