दाउदनगर महाविद्यालय में मनाई गई मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती, साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर हुई संगोष्ठी

Aurangabad News : दाउदनगर महाविद्यालय में मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें उनके साहित्य की सामाजिक प्रासंगिकता और मानवीय मूल्यों पर चर्चा की गई।

Aurangabad News : कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती के अवसर पर दाउदनगर महाविद्यालय में हिंदी विभाग, उर्दू विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. संगोष्ठी का विषय 'प्रेमचंद का साहित्य और समकालीन भारतीय समाज' था.

साहित्य को आमजन के जीवन से जोड़ने वाले लेखक थे प्रेमचंद

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. एमएस इस्लाम ने कहा कि प्रेमचंद ऐसे साहित्यकार थे, जिन्होंने साहित्य को आमजन के जीवन और उसकी वास्तविक समस्याओं से जोड़ा. उनके साहित्य में सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदना, नैतिक मूल्यों तथा शोषित-वंचित वर्ग के संघर्ष का प्रभावशाली चित्रण मिलता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी प्रेमचंद की रचनाएं समाज को सही दिशा देने और मानवीय मूल्यों की स्थापना के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं.

सामाजिक विषमताओं को समझने की दृष्टि देता है प्रेमचंद का साहित्य

हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक मंजू कुमार सोरेन ने प्रेमचंद के साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनाएं भारतीय समाज की संरचना, सामाजिक विषमता, आर्थिक असमानता और विभिन्न अंतर्विरोधों को समझने की दृष्टि प्रदान करती हैं. उन्होंने प्रेमचंद को सामाजिक परिवर्तन का प्रखर चिंतक बताया.

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किसानों, मजदूरों और वंचित वर्ग के संघर्ष को बनाया साहित्य का केंद्र

हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. कुणाल किशोर ने प्रेमचंद के साहित्य का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया. उन्होंने कहा कि प्रेमचंद भारतीय नवजागरण, राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन और सामाजिक परिवर्तन की चेतना के महत्वपूर्ण साहित्यकार थे. उन्होंने किसानों, मजदूरों, दलितों, महिलाओं और वंचित वर्गों के जीवन-संघर्ष को साहित्य के केंद्र में स्थापित किया. उनका साहित्य आज भी लोकतांत्रिक और समतामूलक समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है.

हिंदी-उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि हैं प्रेमचंद

उर्दू विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. हुजैफा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि प्रेमचंद हिंदी और उर्दू की साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतिनिधि साहित्यकार हैं. उनकी रचनाएं भाषा, धर्म और संप्रदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर मानवीय एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देती हैं.

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विद्यार्थियों से प्रेमचंद के साहित्य के अध्ययन का आह्वान

राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी एवं भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. देव प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन किया. उन्होंने प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक चेतना का दस्तावेज बताते हुए विद्यार्थियों से उनकी रचनाओं का गंभीर अध्ययन करने का आह्वान किया. कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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By Om Prakash

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