तीसरा या चौथा सिजेरियन कितना सुरक्षित? औरंगाबाद की डॉक्टर ने बताया कब बढ़ जाता है मां और बच्चे के लिए खतरा

Cesarean Delivery : बार-बार सिजेरियन डिलीवरी से मां की सेहत पर क्या जोखिम हो सकते हैं? जानें विशेषज्ञों की राय और गर्भावस्था से जुड़ी गंभीर जटिलताओं के बारे में पूरी जानकारी.

Cesarean Delivery : बदलती जीवनशैली और चिकित्सीय जरूरतों के कारण सिजेरियन डिलीवरी यानी सी-सेक्शन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में कई महिलाओं के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर एक महिला कितनी बार सिजेरियन डिलीवरी करवा सकती है. स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी कोई निश्चित सीमा तय नहीं है, लेकिन हर सिजेरियन के साथ जोखिम बढ़ता जाता है. इसलिए अगली गर्भावस्था की योजना हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही बनानी चाहिए.

क्या सिजेरियन डिलीवरी की कोई तय सीमा है?

औरंगाबाद की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. कंचन कुमारी के अनुसार, यह तय नहीं है कि कोई महिला अधिकतम कितनी बार सिजेरियन डिलीवरी करवा सकती है. प्रत्येक महिला की शारीरिक स्थिति, उम्र, गर्भाशय की मजबूती, पिछली सर्जरी और वर्तमान गर्भावस्था की जांच के आधार पर ही निर्णय लिया जाता है. इसलिए केवल सिजेरियन की संख्या देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.

हर सिजेरियन के साथ क्यों बढ़ता है खतरा?

विशेषज्ञ बताती हैं कि हर सिजेरियन ऑपरेशन में गर्भाशय पर चीरा लगाया जाता है. बार-बार उसी स्थान पर सर्जरी होने से गर्भाशय की दीवार कमजोर हो सकती है. इससे अगली गर्भावस्था या प्रसव के दौरान गर्भाशय फटने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसी स्थिति मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए गंभीर हो सकती है और तत्काल सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.

प्लेसेंटा से जुड़ी जटिलताओं का बढ़ता है जोखिम

अधिक सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्लेसेंटा प्रीविया और प्लेसेंटा एक्रेटा जैसी गंभीर समस्याओं की आशंका भी बढ़ जाती है. प्लेसेंटा प्रीविया में नाल गर्भाशय के निचले हिस्से में आ जाती है, जबकि प्लेसेंटा एक्रेटा में नाल गर्भाशय की दीवार से असामान्य रूप से चिपक जाती है. इन स्थितियों में प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो सकता है, जो मां के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

किन परिस्थितियों में निकालनी पड़ सकती है बच्चेदानी?

यदि ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हो या प्लेसेंटा को सुरक्षित रूप से अलग करना संभव न हो, तो महिला की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को हिस्टेरेक्टॉमी यानी बच्चेदानी निकालनी पड़ सकती है. इसके बाद महिला दोबारा गर्भधारण नहीं कर सकती.

बार-बार सर्जरी से बढ़ती हैं दूसरी समस्याएं

हर सर्जरी के बाद पेट के अंदर स्कार टिश्यू बनते हैं. कई बार ये आंत, मूत्राशय और गर्भाशय जैसे अंगों को आपस में चिपका देते हैं. इससे अगली सर्जरी अधिक जटिल हो सकती है और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचने की संभावना भी बढ़ जाती है. इसके अलावा संक्रमण और रिकवरी में अधिक समय लगने का जोखिम भी रहता है.

हर महिला की स्थिति अलग होती है

डॉ. कंचन कुमारी के अनुसार, कई महिलाओं में चौथा सिजेरियन भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है, लेकिन इसे उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था माना जाता है. ऐसे मामलों में नियमित जांच, विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी और समय पर उपचार बेहद जरूरी होता है.

जागरूकता और डॉक्टर की सलाह है सबसे जरूरी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दो या तीन सिजेरियन के बाद अगली गर्भावस्था की योजना बनाने से पहले स्त्री रोग विशेषज्ञ से विस्तृत परामर्श अवश्य लें. परिवार नियोजन के सुरक्षित उपाय अपनाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं और किसी भी सामाजिक या पारिवारिक दबाव के बजाय मां और शिशु की सुरक्षा को प्राथमिकता दें.


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Manish raj singham

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >