किशोरों के हितों के हनन मामले में भेजा पत्र

समाज कल्याण विभाग द्वारा उपलब्ध वाहन का निजी उपयोग करते हैं जो समाज कल्याण विभाग के निर्देश के विपरित हैं

औरंगाबाद शहर. किशोर न्याय बोर्ड के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह एसीजेएम ने किशोर न्याय सचिवालय, उच्च न्यायालय पटना के अपर निबंधक को एक पत्र भेजा है. पत्र में कहा गया है कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता में 30 अगस्त को डीएलएमसी की बैठक में सुरक्षित स्थान औरंगाबाद में संसिमित किशोरों से संबंधित समस्याओं पर चर्चा की गयी. 16 अगस्त को सुरक्षित स्थान के प्रभारी अधिक्षक ने टेलीफोन से सूचना दी थी कि एक दर्जन किशोर वायरल बुखार से पीड़ित हैं. पत्रावली के उपरांत भी जिला बाल संरक्षण ईकाई के सहायक निदेशक द्वारा बालकों को न वाहन उपलब्ध कराया गया और न ही डॉक्टर को. समाज कल्याण विभाग द्वारा उपलब्ध वाहन का निजी उपयोग करते हैं जो समाज कल्याण विभाग के निर्देश के विपरित हैं. घटना के दिन एंबुलेंस आने में विलंब होने से किशोर उम्र होकर रात्रि में भूख हड़ताल की थी, ऐसी स्थिति में कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है. सहायक निदेशक का यह कार्य घोर लापरवाही एवं कर्तव्य हिनता घोतक है. इस संबंध में शोकॉज किया गया परंतु सहायक निदेशक ने शौ-कॉज का जबाब देने के लिए अपने आप को उत्तरदाई नहीं माना है. बोर्ड ने ऐसे जवाब को अमर्यादित और खेदजनक माना है और कहा कि पूर्व में भी औरंगाबाद में जिला बाल संरक्षण ईकाई के सहायक निदेशक पर गंभीर आरोप लग चुके हैं जिसकी जांच चल रही है. इनकी असंवेदनशीलता और प्रशासनिक विफलता से 15 अक्टूबर 2021 को सुरक्षित स्थान से आवासित कुछ किशोर मुख्य द्वार से भाग गये थे. मामले को गंभीरता देखते हुए समाज कल्याण निदेशालय के निदेशक द्वारा जांच दल से जांच कराई. जांच में प्रशासनिक चूक और लापरवाही की बात सामने आई थी. इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई संचालित और लंबित रहते हुए पुनः औरंगाबाद में पदस्थापित किया गया है जिससे साक्ष्य प्रभावित हो सकता है. इनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए पत्र की प्रतिलिपि जिलाधिकारी, समाज कल्याण विभाग के सचिव, समाज कल्याण विभाग के निदेशक को भेजी गई है.

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