बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग द्वारा दाउदनगर के ऐतिहासिक जिउतिया लोकोत्सव को राज्य के सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल किए जाने और लोक उत्सव का दर्जा मिलने पर नगर पर्षद की मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी ने इसे पूरे दाउदनगर के लिए गौरव और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया.
अपने कार्यालय कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य पार्षद ने कहा कि लगभग 150 वर्ष से अधिक पुरानी जिउतिया लोकोत्सव की परंपरा को यह सम्मान यहां की जनता, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक प्रेमियों के लंबे प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि दाउदनगर सदियों से लोक संस्कृति और लोक कलाकारों की समृद्ध भूमि रहा है तथा जिउतिया लोकोत्सव यहां की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख प्रतीक है.
उन्होंने इस परंपरा की नींव रखने वाले महान पूर्वजों और गुरुओं को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए स्व. ज्ञानचंद उस्ताद, वासु खलीफा, बंसी उस्ताद सहित उन सभी कलाकारों को याद किया, जिन्होंने जिउतिया की पारंपरिक नकल कला को जीवंत बनाए रखा. साथ ही वर्तमान लोक कलाकारों और सांस्कृतिक प्रेमियों का भी आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से यह विरासत आज भी सुरक्षित है.
मुख्य पार्षद ने बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री, विभागीय सचिव, निदेशक तथा सभी अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी मांग को स्वीकार कर सरकार ने दाउदनगर की सांस्कृतिक धरोहर को उचित सम्मान दिया है.
उन्होंने बताया कि नगर पर्षद दाउदनगर की ओर से चार दिवसीय जिउतिया लोकोत्सव के आयोजन के लिए लगभग 27 लाख रुपये का विस्तृत बजट तैयार कर राज्य सरकार को भेजा गया है. अब सरकार के स्तर पर यह निर्णय लिया जाएगा कि आयोजन के लिए कितनी राशि स्वीकृत की जाती है.
प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य पार्षद प्रतिनिधि गणेश प्रसाद, सशक्त स्थायी समिति सदस्य जय गोविंद प्रसाद, वार्ड पार्षद दिनेश प्रसाद तथा वार्ड पार्षद प्रतिनिधि जहांगीर कुरैशी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे.
