Aurangabad News : शोषितों, पीड़ितों, गरीबों और वंचितों के अधिकार की लड़ाई को अपनी जिंदगी का मकसद बनाने वाले बिहार लेनिन शहीद जगदेव प्रसाद को उनके 52वें शहादत दिवस पर औरंगाबाद जिले के पचरूखिया में श्रद्धापूर्वक याद किया गया. इस अवसर पर आयोजित समारोह में बड़ी संख्या में लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया.
सामाजिक न्याय और बराबरी के प्रतीक
शहादत दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रखंड प्रमुख श्रीनिवास सिंह और राजद नेत्री सोनम कुशवाहा ने कहा कि जगदेव प्रसाद ने अपने जीवन की परवाह किए बिना शोषित और वंचित समाज के हक की लड़ाई लड़ी.
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू केवल एक नेता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बराबरी की लड़ाई के मजबूत प्रतीक थे. उन्होंने अंतिम सांस तक गरीबों और पिछड़ों की आवाज बुलंद की और इसी संघर्ष में अपनी शहादत दी.
शोषणमुक्त समाज का देखा था सपना
वक्ताओं ने कहा कि जगदेव प्रसाद का संघर्ष किसी एक वर्ग या व्यक्ति तक सीमित नहीं था. उनका सपना ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहां शोषण और भेदभाव के लिए कोई जगह न हो तथा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी सम्मान और अधिकार मिले. उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को जगदेव प्रसाद के संघर्ष और विचारों से प्रेरणा लेने की जरूरत है.
विचार आज भी समाज में जीवंत
समारोह की अध्यक्षता पैक्स अध्यक्ष श्याम किशोर सिंह ने की, जबकि संचालन पूर्व सरपंच रणधीर कुमार ने किया. इस दौरान वक्ताओं ने जगदेव प्रसाद के जीवन संघर्ष और सामाजिक योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि जगदेव बाबू भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी जीवंत हैं. उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक न्याय और समानता के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा देता रहेगा.
समारोह में कई गणमान्य रहे उपस्थित
मौके पर समाजसेवी कामता प्रसाद, राजद नेता रविंद्र यादव, शत्रुघ्न सिंह, रामेश्वर सिंह, भोला राम, रामप्रवेश सिंह, अनिल कुमार, डॉ जैलेश प्रसाद, बृजनंदन मेहता, बसंत कुमार, बबन मेहता, रामजीत राम, परशुराम वर्मा, नागा सिंह आदि शामिल थे.
