किसानों में आक्रोश, सिंचाई विभाग पर उठे सवालओबरा. एक ओर सरकार सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, ताकि किसानों की उपज बढ़े और वे आत्मनिर्भर बन सकें. वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग के अधिकारी सरकारी राशि का समुचित उपयोग करने के बजाय घटिया निर्माण कार्य करा कर सरकारी मंशा पर पानी फेरने में जुटे हैं. ताजा मामला ओबरा प्रखंड के होली चक माइनर का है, जहां हाल ही में मरम्मत करायी गयी नहर का हिस्सा टूटकर बिखर गया है. इससे इलाके के सैकड़ों किसानों को खेतों में पानी पहुंचाने में भारी परेशानी हो रही है. यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं करायी गयी, तो करीब 500 एकड़ भूमि असिंचित रह जायेगी, जिससे फसल उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा.
60 लाख रुपये की मरम्मत भी साबित हुई नाकाफी
ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष सिंचाई विभाग ने माइनर की मरम्मत के लिए करीब 60 लाख रुपये खर्च किये थे. समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक कमलेश कुमार विकल के प्रयास से मंगरु बिगहा गांव के पास नहर की मरम्मत करायी गयी थी. लेकिन घटिया सामग्री के उपयोग के कारण नहर की दीवारें ज्यादा समय तक नहीं टिक सकीं और फिर से क्षतिग्रस्त हो गयी. किसान शैलेंद्र शर्मा, कपिल शर्मा, बबलू मेहता, सुरेंद्र प्रसाद, मिथिलेश राम, परशुराम सिंह और नंद शर्मा सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि नहर के टूटने से खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है. समय पर पानी नहीं मिलने से धान की खेती पर बुरा असर पड़ रहा है. किसानों ने आरोप लगाया कि विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
सिंचाई विभाग ने दी सफाई
इस संबंध में सिंचाई विभाग के एसडीओ शेष राम वर्मा ने बताया कि माइनर में पानी का दबाव अधिक होने के कारण उसका एक हिस्सा टूट गया है. जल्द ही उसकी मरम्मत कर दी जायेगी. विभाग पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है, किसानों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जायेगी.
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