औरंगाबाद में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान तेज होगी, 149 बच्चों के बाद अब हर आंगनबाड़ी केंद्र पर चलेगा अभियान

जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में गंभीर कुपोषित बच्चों की समय पर पहचान और समुचित उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अब विशेष अभियान चलाकर बच्चों को जोड़ा जाएगा.

Aurangabad News: औरंगाबाद के जिलाधिकारी कार्यालय कक्ष में बुधवार को स्वास्थ्य और बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने सदर अस्पताल परिसर में संचालित 20 बेड की क्षमता वाले पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की कार्यप्रणाली और सुविधाओं की गहन समीक्षा की. डीएम ने निर्देश दिया कि छह माह से पांच वर्ष तक के सभी गंभीर रूप से कुपोषित (एसएएम) बच्चों को समय पर चिन्हित कर केंद्र में समुचित उपचार और पोषण उपलब्ध कराया जाए.

एनआरसी में मिल रहीं सुविधाएं और प्रोत्साहन राशि

समीक्षा के दौरान केंद्र में उपलब्ध चिकित्सीय व पोषण संबंधी व्यवस्थाओं का ब्योरा रखा गया:

  • निःशुल्क चिकित्सीय देखभाल: छह माह से पांच वर्ष तक के गंभीर कुपोषित बच्चों को भर्ती कर विशेष निगरानी में पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय देखरेख दी जाती है.
  • देखभालकर्ता को भोजन: भर्ती बच्चे के साथ रहने वाली माता अथवा अन्य देखभालकर्ता को प्रतिदिन निःशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है.
  • दैनिक प्रोत्साहन भत्ता: भर्ती रहने की अवधि के दौरान बच्चे के अभिभावक को आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में प्रतिदिन 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है.

अब तक 149 बच्चे जुड़े, सदर प्रखंड से चलेगा विशेष अभियान

बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से अब तक कुल 149 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्र से जोड़ा जा चुका है.

जिलाधिकारी ने इस आंकड़े को और बढ़ाने तथा दूर-दराज के क्षेत्रों तक दायरा फैलाने के लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया. इस अभियान की शुरुआत प्राथमिकता के आधार पर सदर प्रखंड से की जाएगी, जिसके बाद इसे जिले के अन्य सभी प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से विस्तारित किया जाएगा.

आईसीडीएस और स्वास्थ्य विभाग को समन्वय के निर्देश

जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ, आईसीडीएस) को स्पष्ट आदेश दिया कि सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) और महिला पर्यवेक्षिकाओं (एलएस) को अपने-अपने पोषक क्षेत्रों में सक्रिय किया जाए.

आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के माध्यम से घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान की जाएगी और परिजनों को एनआरसी में मिलने वाली सुविधाओं के प्रति जागरूक कर बच्चों का पंजीकरण कराया जाएगा.

जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने जोर देकर कहा कि "कुपोषण से जंग में समय पर पहचान और उचित उपचार ही सबसे प्रभावी माध्यम है. प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र आपसी समन्वय से यह सुनिश्चित करे कि जिले का कोई भी कुपोषित बच्चा स्वास्थ्य लाभ से वंचित न रहे."

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By सुधीर कुमार सिन्हा

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