Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड अंतर्गत महुआंव पंचायत के कैथी टोला (मंगरू बिगहा गांव) में तकनीकी खामियों के चलते एक गरीब महादलित परिवार पिछले छह महीने से सरकारी खाद्यान्न से वंचित है. सरकार जहां जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराने के लिए नए कार्ड बनाने पर जोर दे रही है, वहीं मंगरू बिगहा निवासी बिधचन राम और उनकी पत्नी जनकिया देवी पुराना राशन कार्ड होने के बावजूद अनाज पाने के लिए सरकारी दफ्तरों और डीलर के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
फिंगरप्रिंट फेल और राशन कार्ड से नाम कटने का दर्द
पीड़ित दंपति के अनुसार, राशन वितरण की डिजिटल व्यवस्था उनके लिए परेशानी का सबब बन चुकी है:
- बायोमेट्रिक मिलान नहीं: बिधचन राम जब भी नजदीकी जन वितरण प्रणाली की दुकान पर जाते हैं, तो ई-पॉस (e-PoS) मशीन में उनका फिंगरप्रिंट मैच नहीं करता, जिससे उन्हें अनाज देने से मना कर दिया जाता है.
- राशन कार्ड से नाम गायब: उनकी पत्नी जनकिया देवी का नाम पहले से बने राशन कार्ड से अचानक कट गया है, जिससे परिवार के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है.
- दफ्तरों से नहीं मिल रही मदद: पीड़ित परिवार का आरोप है कि प्रखंड स्तर के आपूर्ति पदाधिकारियों और राशन कार्ड कर्मियों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
डीलर ने तकनीकी प्रक्रिया पूरी करने की दी सलाह
मामले को लेकर स्थानीय पीडीएस डीलर पारस नाथ ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है.
"बिधचन राम का बायोमेट्रिक और आधार डाटा सर्वर पर अपलोड नहीं होने के कारण पॉस मशीन उनका फिंगरप्रिंट स्वीकार नहीं कर रही है. इसकी जानकारी पहले ही लाभार्थी को दे दी गई है. वहीं उनकी पत्नी जनकिया देवी का नाम पुनः जुड़वाने के लिए आवासीय और आय प्रमाण पत्र बनवाकर एमओ (प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी) कार्यालय में जमा करने को कहा गया है. हमारे स्तर से किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं की जा रही है." — पारस नाथ, स्थानीय पीडीएस डीलर
