औरंगाबाद के दाउदनगर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पारंपरिक 'जिउतिया लोकोत्सव' का आयोजन इस वर्ष बेहद धूमधाम और भव्य तरीके से किया जाएगा. इस लोकोत्सव की तैयारियों और आयोजन की पूरी रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए अनुमंडल कार्यालय में अनुमंडल प्रशासन एवं नगर पर्षद की एक संयुक्त उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई. बैठक में लोकोत्सव को अधिक से अधिक भव्य, आकर्षक और व्यवस्थित तरीके से आयोजित करने को लेकर विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई.
बैठक की अध्यक्षता करते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) अमित राजन ने कहा कि जिउतिया लोकोत्सव दाउदनगर की एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है. इसे बेहतर और सफल तरीके से आयोजित करने के लिए प्रशासन की ओर से सभी आवश्यक तैयारियां अभी से सुनिश्चित की जा रही हैं. उन्होंने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि इस लोकोत्सव में स्थानीय कलाकारों को भी अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कला को बढ़ावा मिल सके.
विधि-व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर
बैठक के दौरान पूरे पर्व और उत्सव के दौरान क्षेत्र में कड़ी विधि-व्यवस्था बनाए रखने, विभिन्न कार्यक्रमों के सफल संचालन और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा समेत अन्य व्यवस्थाओं पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया. अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने लोकोत्सव को और अधिक आकर्षक और यादगार बनाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए.
उल्लेखनीय है कि दाउदनगर की ऐतिहासिक जिउतिया परंपरा को पहली बार इसी वर्ष बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के आधिकारिक सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल किया गया है. इस लोकोत्सव के सफल आयोजन के लिए सरकार की ओर से तीन लाख रुपए की राशि भी विशेष रूप से आवंटित की गई है. बैठक में इस अनुदान राशि का सदुपयोग करते हुए लोकोत्सव को व्यापक स्तर पर आयोजित करने तथा दाउदनगर की लोक संस्कृति और परंपरा को एक नई पहचान दिलाने पर भी विशेष चर्चा की गई.
इस संयुक्त बैठक में एसडीपीओ चंद्र भूषण, नगर पर्षद की मुख्य पार्षद अंजलि कुमारी, उप मुख्य पार्षद कमला देवी, स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य डॉ. केदारनाथ सिंह, परवीन कौशर एवं जय गोविंद प्रसाद, कार्यपालक अधिकारी (EO) ऋषिकेश अवस्थी समेत कई अन्य गणमान्य अधिकारी और लोग उपस्थित रहे.
