Aurangabad News : मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत शनिवार को बारुण प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान बच्चों को हाथ धुलाई, खुले में शौच से होने वाले खतरों तथा मानव मल के सुरक्षित निपटान की जानकारी दी गयी. नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रतनौर सहित दर्जनों विद्यालयों में नामित फोकल शिक्षकों ने बच्चों को स्वच्छता के महत्व से अवगत कराया.
साबुन से हाथ धोने से संक्रमण से बचाव
फोकल शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि स्वच्छता के बिना स्वस्थ और बेहतर जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. संक्रमण से बचाव के लिए नियमित रूप से साबुन से हाथ धोना बेहद जरूरी है. साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने से डायरिया, दस्त, पीलिया सहित कई संक्रामक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है.
खुले में शौच से पर्यावरण प्रदूषण का खतरा
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को खुले में शौच से होने वाले दुष्परिणामों की भी विस्तार से जानकारी दी गयी. फोकल शिक्षकों ने बताया कि खुले में शौच करने से मानव मल के माध्यम से पर्यावरण प्रदूषित होता है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ जाती है. इसलिए नियमित रूप से शौचालय का उपयोग करने और मानव मल का सुरक्षित तरीके से निपटान करने की आवश्यकता है.
शौचालय के नियमित उपयोग पर दिया जोर
नवसृजित प्राथमिक विद्यालय रतनौर के प्रधानाध्यापक नंदलाल सिंह ने कहा कि केवल घरों में शौचालय का निर्माण कर देने से स्वच्छता का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. शौचालय का नियमित उपयोग करने, शौच के बाद साबुन से अच्छी तरह हाथ धोने तथा घर और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखने की भी जरूरत है. उन्होंने बच्चों से अपने परिवार और आसपास के लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की अपील की.
बाल संसद और मीना मंच की भागीदारी पर जोर
कार्यक्रम के दौरान बाल प्रेरक, बाल संसद, मीना मंच तथा विद्यालय आपदा प्रबंधन समिति के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया. विभिन्न विद्यालयों में बच्चों को साबुन से सही तरीके से हाथ धोने का मॉक ड्रिल कराया गया, ताकि वे स्वच्छता के व्यवहार को दैनिक जीवन में अपना सकें.
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स्लोगन के माध्यम से लोगों को किया जागरूक
बच्चों ने स्वच्छता से जुड़े स्लोगन लिखी तख्तियां हाथों में लेकर लोगों को जागरूक किया. उन्होंने अपने घर और आसपास के लोगों को स्वच्छता अपनाने तथा स्वच्छ जीवन का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया. कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ सामुदायिक स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया.
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